पहलवान तगड़ा जिन्न ने पकड़ा । जिन्नात की सच्ची कहानी। 1 जिन्न की कहानी | Passionate Djinn

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प्रिय पाठकों, हमें उम्मीद है कि आपको हमारी यह कहानी (पहलवान तगड़ा जिन्न ने पकड़ा । जिन्नात की सच्ची कहानी। जिन्न की कहानी) आपको बहुत पसंद आएगी।

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जिन्नात की सच्ची कहानी


ओमबीर के शरीर में वो “जबबार जिन्न” आ घुसा और जिन्न के घुसते ही बीमार ओमबीर एकदम से खाट से कूद कर ज़मीन पर घुटनों के सहारे बैठ गया, बैठते ही उस जिन्न ने सबसे पहले तो अपना कुर्ता फाड़ा फिर भारी आवाज़ में लगातार बोलने लगा कि मुझे क्यों बुलाया जल्दी बताओ!
जिन्न के आने के बाद ओमबीर की छाती फूल कर “गुब्बारा” हो गई थी, आँखें “अंगार” के जैसे सुर्ख लाल थी और बार–बार वो जिन्न छाती पीट पीटकर यही कह रहा था कि मुझे क्यों बुलाया! ऐसा खौफनाक मंजर देख कर सभी लोगों की फूंक सरक चुकी थी!

फिर क्या हुआ? “जिन्नात की सच्ची कहानी” पूरी कहानी पढ़कर जाने…

पहलवान तगड़ा जिन्न ने पकड़ा की भूमिका Jin ki Kahani

नमस्कार दोस्तों आपके और हमारे इस रोमांच के सफर में आपका स्वागत है! जिन्न या जिन्नात Jinn का नाम सुनते ही आपके मन में क्या आता है?
हम सभी के बारे में तो नहीं कह सकते परन्तु ज्यादातर लोगो के मन में फिल्मों या धारावाहिकों में दिखाए गए जिन्न Jinn और उनकी वो “चिराग” की छवि सामने आती है मगर असल ज़िन्दगी में इनके कार्य और शक्तियाँ बहुत अलग होती हैं!

ओमबीर और जब्बार का पहला संपर्क Jinn

बात 18 वर्ष पुरानी हैं और उत्तर प्रदेश के जिला मुज़फ्फरनगर के एक गाँव की है! गाँव के पास एक बड़ा अस्पताल था जहाँ लोग दूर–दूर से अपना इलाज कराने आया करते थे! अस्पताल के साथ में काफ़ी बड़ा खाली मैदान था जहाँ गाँववाले अपने पालतू पशुओं को चराने और घूमाने के लिए ले जाया करते थे!

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इसी गाँव में एक ओमबीर नाम का “भगत” रहता था जो पहले पहलवानी भी कर चुका था और उसकी कद काठी अब भी विशालकाय थी जिसके पास काफी सिद्धियां और शक्तियां थी जिससे वो लोगो पर चढ़े भूत, प्रेतों (Bhoot Pret)और बुरी आत्मओं को भगाता था और निस्वार्थ भाव से उनको स्वस्थ करता था!

ओमबीर का कद साढ़े छः फुट और शरीर एकदम गठा हुआ मजबूत था! निस्वार्थ सेवा का भाव उसके मन में विद्यमान था जिसकी वजह से पूरा गाँव उसकी बहुत इज़्ज़त करता था और लोग दूर–दूर से आकर उससे अपनी समस्यों का समाधान कराते थे

Jin ki Kahani

ओमबीर भी अस्पताल से लगे उसी मैदान में सुबह का नाश्ता करके अपने पशुओं को चराने के लिए ले जाया करता था, ओमबीर को “मावे की बर्फी” बहुत पसंद थी! वो
घर में मावे की बर्फी बहुत मात्रा में लाकर रखता था और नाश्ता करते ही बर्फी के चार टुकड़े लेकर बर्फी खाता हुआ ही पशुओं को लेकर मैदान में आ जाता था!

एक दिन अस्पताल में एक पहलवान इलाज़ के लिए आया, पहलवान का नाम “जबबार” था, पहलवान होने की वजह से उसकी कद–काठी शानदार थी, जबबार काफ़ी दिनों से बहुत ही ज्यादा बीमार था, डॉक्टरों नें उसको देखा, जाँच कराई और दो दिनों बाद जब जाँच की रिपोर्ट आई तो पता चला की पहलवान को एक लाईलाज बीमारी है और उसकी भी आखिरी स्टेज है! इसका पता पहलवान और घरवालों को चला और पुरे परिवार में मातम छा गया!

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अब उसको अस्पताल में ही रहना था इसलिए उसको अस्पताल के एक कमरे में रखा जाने लगा, उस कमरे की खिड़की के साथ ही उसका पलंग था और वो खिड़की मैदान की तरफ खुलती थी जहाँ से ओमबीर बर्फी खाता हुआ अपने पशुओं को चराने के लिए ले जाता था! जबबार रोज पलंग पर लेटा हुआ मायूसी से बाहर देखता रहता था जहाँ सुबह उसको ओमबीर बर्फी खाते हुए अपने पशुओं को चराने के लिए ले जाता दिखता था!

मावे की बर्फी पर फिसला जिन्न Ghost Stories


ओमबीर और जबबार में दो बातें एक समान थी, एक तो दोनों की कद–काठी बहुत शानदार थी और दूसरी बात कि दोनों को ही “मावे की बर्फी” बहुत ज्यादा पसंद थी! अब रोज ऐसा ही होता, जबबार को तो कहीं जाना नहीं होता था तो वो पलंग पर लेटा रहता और बाहर देखता रहता और उधर से ओमबीर अपने पशुओं को चराने के लिए बर्फी खाता हुआ आता और खिड़की के सामने रखे बड़े पत्थर पर बैठ कर बर्फी खाता,

Jinn

ये सब होते हुए हमेशा की तरह जबबार देखता रहता है! ऐसा ही 40 दिनों तक चलता रहा!
एक दिन वो हो गया जिसका सबको डर था, “जबबार पहलवान”  दुनिया को छोड़ गया , जबबार का पूरा परिवार शोक में डूबा था और उधर ओमबीर को इसकी खबर तक नहीं थी क्यूंकि ओमबीर की तरफ से तो कोई रिश्ता था ही नहीं उसके लिए तो जबबार एक बीमार मरीज था और ऐसे कई मरीज ओमबीर कई सालों से उस खिड़की वाले पलंग पर लेटे देखता आया था तो उसको वैसे भी क्या फर्क पड़ना था मगर “जबबार पहलवान” ने उन बीते 40 दिनों में ओमबीर को आता–जाता देख ओमबीर से एक रिश्ता बना लिया था!

पहलवान पर जिन्न का हमला Horror Story in Hindi

जिस रात जबबार की मृत्यु हुई उसी रात जबबार का शरीर उसके परिवार को सौंप दिया गया और वो पलंग खाली हो गया अब सुबह हुई और हमेशा की तरह ओमबीर अपने पशुओं को लेकर “मावे की बर्फी” खाता हुआ मैदान में आया और उसी पत्थर पर बैठ कर अपनी बर्फी खाने लगा और जैसे ही उसने सामने अस्पताल की खिड़की से पलंग की तरफ देखा तो उसको थोड़ा अजीब सा महसूस हुआ क्यूंकि वो पलंग अब खाली था

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तो उसने ज्यादा इस बारे में नहीं सोचा की ऐसा क्यों हुआ होगा, ओमबीर को लगा के मरीज ठीक होकर घर चला गया होगा या उसको दूसरे कमरे में भेज दिया गया होगा!
काफी देर पशुओं को चराने और अपनी पसंदीदा सारी बर्फीयां ख़त्म करने के बाद ओमबीर वहाँ से घर के लिए निकल गया, घर मैदान से पास ही में था तो वो आकर बिना दोपहर का खाना खाये कमरे में जाकर लेट गया,

घरवालों ने पूछा तो कहने लगा की थकान महसूस हो रही है इसलिए थोड़ी देर सो जाता हूँ, ये कहकर वो सो गया और जब उसको रात में उठाया गया तो उससे उठा नहीं गया, उसका शरीर “गर्म भट्टी” की तरह तप रहा था, न तो वो बिस्तर से उठ ही पा रहा था और न ही उससे कुछ बोला जा रहा था!

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ओमबीर के घरवाले ओमबीर को डॉक्टर के पास लेकर गए, उसने कुछ जाँच कराने को कहा और दवाई देकर घर भेज दिया, घरवाले ओमबीर को जाँच करा कर और दवाई लेकर घर आ गए! दवाई देकर उस रात तो ओमबीर को सुला दिया गया मगर सुबह जैसे ही उठ कर घरवालों ने देखा तो कोई भी फर्क डॉक्टर की उस दवाई से नहीं पड़ा था! घरवाले फिर ओमबीर को उसी डॉक्टर के पास ले गए डॉक्टर ने जाँच की रिपोर्ट देखी और कहा की जाँच तो सारी ठीक हैं और मैं दवाई बदल कर दे रहा हूँ इससे जरुर आराम आ जायेगा मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ ओमबीर की तबियत जस की तस बनी रही!

जिन्न ने पहलवान को दी धोबी पछाड़ Jinn


घरवालों का सारा ध्यान ओमबीर पर था क्यूंकि 20 दिन गुजर चुके थे और ओमबीर की तबियत बद से बदत्तर हो गई थी, शरीर में इतनी कमजोरी आ गई थी कि शरीर 20 दिन पहले के मुकाबले आधा ही रह गया था, ओमबीर से न कुछ खाया जा रहा था न ही पिया जा रहा था, बीते 20 दिनों में ओमबीर के घरवालों ने ओमबीर को डॉक्टरों को ही नहीं कई वैदों और बड़े–बड़े भगतों को भी दिखाया था मगर कोई सुधार ओमबीर की तबियत में नहीं हुआ,

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ये बात यहाँ याद रखनी जरुरी है कि ओमबीर भी एक भगत था जिसके पास खुद बहुत अच्छी विद्या थी और लोगो पर या उनके घरों पर से बुरी आत्मओं, भूत–प्रेतों के बहुत सारे बड़े मामले उसने निपटाए थे और बुरे समय की मार देखिये यहाँ वो खुद बेबस था और अब तक कोई उसकी मदद करने वाला उसके पास नहीं पहुँच सका था!

समय तो करवट लेता ही है तो समय ने करवट ली और एक जाना माना भगत का ओमबीर के घरवालों को पता चला तो तुरन्त ही उन्होंने उस भगत की मिन्नतें करके उसको लेने अपनी गाड़ी भेज बुलवाया और ओमबीर की माँ ने रो–रोकर सारी बात भगत को बता डाली और अंत में कहा की “मेरा बेटा ओमबीर तो खुद इतना बड़ा भगत है मगर न जाने क्या हो गया है इसका जादू इसकी विद्या सब एकदम रूठ से गए हैं!

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इनमे से मेरे बेटे के इस समय कुछ काम नहीं आया“
भगत बहुत समझदार और ज्ञानी था तो उसने पहले तो ओमबीर से पिछले 25 दिनों का जबसे उसकी तबियत खराब है सारी बातें जानी! फिर भगत ने ध्यान लगाया अपने देवी और देवता को याद करके उनसे पूछा की आखिर ऐसा क्यों हो रहा है फिर एक “देव” भगत के “सर” आकर बोलने लगे कि पूछो क्या पूछना है तो ओमबीर की माँ ने कहा कि “मेरा बेटा ओमबीर 25 दिनों से बीमार है,

सबकुछ करके देख लिया डॉक्टरी भी कर ली और ओमबीर भगत भी है मगर हमारे देवी–देवता अब इसका साथ नहीं दे रहे जिसकी वजह से पता नहीं लग पा रहा कि ऐसा क्यों हो रहा है” भगत के सर आये देव बोले तेरा बेटा जहाँ अपने पशु चराने जाता था उसी मैदान के साथ वाले अस्पताल में एक व्यक्ति मर गया था और अब वो जिन्न बनकर तेरे बेटे पर सवार है! 25 दिन पहले ही उसकी मौत हुई थी उसका नाम जबबार पहलवान है,

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ओमबीर उसी जिन्न (Jinn) के पूरी तरह वश में है! ओमबीर के सभी घरवाले खड़े होकर ये सब देख सुन रहे थे और  जिन्न का नाम सुनकर सबकी जान हलक में थी कि अब क्या होने वाला है? क्या इस जिन्न से हमें छुटकारा मिलेगा या नहीं?

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सबके मन में ऐसे ही बुरे ख्याल आ रहे थे, उधर भगत के सर आये देव ने अपनी बात आगे बढ़ाई और ओमबीर कि माँ से कहा कि माताजी इस जिन्न Jinn ने आपके सारे देवी–देवता बांध कर घर से बाहर कर दिये हैं और अब ये अपनी मन मर्ज़ी कर रहा है और कह रहा है कि ओमबीर को साथ लेकर ही जाऊँगा!

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ओमबीर की माँ का रोकर बुरा हाल था पूरा परिवार इन बातों से देहल गया था, ये वह समय था कि कब, क्या हो जाये कोई कुछ नहीं कह सकता था! ओमबीर की माँ एक भगत की माँ थी इसलिए उसको थोड़ा ज्ञान और अनुभव तो था ही तो उसने खुद को संभाला और भगत के सर आये देव से कहा की क्या वो उस “जबबार पहलवान” नाम के जिन्न से मेरी बात करा सकते हैं? इसपर देव ने कुछ समय लिया और कहा की जबबार बात करने को तैयार नहीं है उसने तो ओमबीर को अपने साथ ले जाने की रट लगाई है बस इसके अलावा उसको कुछ नहीं चाहिए!

माँ ने जब्बार जिन्न को बनाया बेटा Jin ki Kahani

यह समस्या बहुत ही गंभीर रूप ले चुकी थी लगभग सबने ओमबीर की बचने की आस छोड़ दी थी क्यूंकि जहाँ देवी–देवता उस शक्तिशाली जिन्न Jinn के आगे बेबस थे तो फिर आम आदमी और डॉक्टरों से उम्मीद रखना तो बेमानी ही थी! मगर वो कहते हैं ना कि माँ एक योद्धा होती है और वो अपने बच्चों के लिए जरुरत पड़ने पर जिन्न तो क्या पूरी कायनात का भी मुकाबला अकेले कर सकती है!

ऐसा ही कुछ यहाँ होने वाला था क्यूंकि सबने हार मान ली थी सिर्फ माँ थी जो अभी भी प्रयास करे जा रही थी! माँ बार–बार कह रही थी कि एक बार इस जिन्न Jinn से बात करवा दे बस एक बार!

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भगत के सर से देव जा चुके थे! अब भगत ने कहा कि ये जिन्न मेरे देव की तो बात नहीं मान रहा है अब मैं एक आखिरी प्रयास करके देख लेता हूँ!

भगत ने कहा कि पास ही के एक “पीर साहब” पर जाकर जल्दी से एक “हरी चादर“चढ़ा आओ मैं उनकी भी सेवा करता हूँ और उनसे अपने इलाज वाले काम भी करवाता हूँ उन्ही के द्वारा इस जिन्न Jinn को ओमबीर में बुलवाकर इससे बात करेंगे!
परिवार वालों ने ऐसा ही किया, जल्दी से पास की दुकान से चादर और कुछ पताशे लिए और पास ही के “पीर साहब” पर चढ़ा आये! भगत ने अब फिरसे अपनी कोशिश शुरु की और जिन्न से कहा कि “ऐ ताकतवर जिन्न Jinn जबबार पहलवान तुझे सलाम तुझे पीर साहब का वास्ता है

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एक बार, बस एक बार इस ओमबीर के शरीर में आकर हमसे दो बातें कर ले फिर तू जो चाहेगा ऐसा ही होगा“
“पीर साहब” पर चादर चढ़ाये कुछ ही देर हुई थी कि ओमबीर के शरीर में वो “जबबार जिन्न” आ घुसा और जिन्न Jinn के घुसते ही बीमार ओमबीर जो खाट पर आँखें बंद करके कबसे करराह रहा था

वो एकदम से खाट से कूद कर ज़मीन पर घुटनों के सहारे बैठते ही ओमबीर में आये उस जिन्न Jinn ने सबसे पहले तो अपना कुर्ता फाड़ा फिर भारी आवाज़ में लगातार बोलने लगा कि मुझे क्यों बुलाया जल्दी बताओ!
जिन्न के आने के बाद ओमबीर की छाती फूल कर “गुब्बारा” हो गई थी, आँखें “अंगार” के जैसे सुर्ख लाल थी और बार–बार वो जिन्न छाती पीट कर यही कह रहा था कि मुझे क्यों बुलाया! ऐसा खौफनाक मंजर देख कर सभी लोगों की फूंक सरक चुकी थी, इन लोगो ने भूत (Ghost) को तो इन्सान के सर आते कई बार देखा था मगर जिन्न Jinn वाला ये मंजर सबसे डरावाना था!

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अब भगत ओमबीर में आये “जबबार जिन्न” से बातें करना शुरू कर देता है! ” बोल तू कौन है? कहाँ से ओमबीर के पीछे लगा? ओमबीर और इस घर से क्या चाहता है?
अब “जबबार जिन्न” Jinn गुस्से में सब बताने लगता है! “मैं एक पहलवान था, मुझे मेरे शरीर से बहुत प्यार था, पहलवानी करना और अपने शरीर का ख्याल रखना यही मेरा जीवन लक्ष्य था और मुझे मीठा बहुत पसंद था जिसमे “मावे की बर्फी” तो मैं रोज ही खाया करता था,

जब मुझे मेरी लाईलाज बीमारी का पता चला और मैं अस्पताल में था तभी मैंने ओमबीर को देखा, एक तो ओमबीर का शरीर मुझे भा गया दूसरा ये रोज “मावे की बर्फी” जो खाता था उसपर मेरा दिल आ गया और मुझे मरने के बाद मेरा इसके साथ रहने का ही दिल करने लगा और मैं मैदान में इसका रात से ही इंतज़ार कर रहा था जैसे ही सुबह हुई ओमबीर आया और मैं इसके साथ हमेशा के लिए लग आया हूँ और अब मुझे कुछ नहीं चाहिए और इसके शरीर को मैं छोड़ने वाला भी नहीं हूँ,

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इसको अपने साथ अपनी दुनिया में लेकर ही जाऊँगा चाहे तुम कितना भी जोर लगा लो“
भगत को तो पहले ही पता था कि ऐसा ही होना है ये जिन्न किसी की नहीं मानते हैं तो उसने अपना पेंतरा चल दिया और जिन्न Jinn से कहा

“तू और मैं हम दोनों “पीर साहब” के आगे सर झुकाते हैं, “पीर साहब” ही हमारे सरताज हैं, मैं तुझे उन्हीं पीर साहब का वास्ता देता हूँ कि तू ओमबीर को साथ ले जाने की जगह और कुछ मांग ले मैं तुझे वचन देता हूँ तेरा कहा सब कुछ सर–आँखों पर होगा और यह ओमबीर का परिवार उसको पूरी शिद्दत से निभाएगा,

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तू बस ओमबीर को साथ ले जाने की जिद्द छोड़ दे“
“पीर साहब” की बात होते ही जबबार जिन्न Jinn की आक्रमकता में अब कुछ कमी आती है और वो कहता है कि “मैं ओमबीर का साथ तो नही छोडूंगा हाँ मगर इसको अपने साथ नही ले जाऊँगा बल्कि इसके साथ हर जगह हर हाल में रहूँगा, एक शर्त आपको मेरी माननी पड़ेगी तभी मैं ओमबीर क़ी जान बक्शऊँगा और ओमबीर की ताकत को बढ़ा कर इसका साथ हमेशा दूँगा“भगत और घरवालों की उम्मीद अब जाग जाती है और भगत अब तपाक से उससे पूछ लेता है किओमबीर की जान बक्शने की तेरी क्या शर्त है?

जबबार जिन्न Jinn कहता है कि “जैसे ओमबीर का परिवार अपने कुलदेवी और कुलदेवता को हर साल, हर त्यौहार और हर बड़ी खुशी में पूजता है बिलकुल वैसे ही उनके बराबर मुझे स्थान देना होगा और विधिवत मुझे भी पूजना होगा तभी ओमबीर की जान बचेगी नही तो इस अमावस्या पर मैं इसको अपने साथ ले जाऊँगा और मुझे कोई भगत या कोई शक्ति नही रोक पाएगी“

जिन्न की कहानी Jinn

भगत इससे पहले कुछ बोल पाता ओमबीर की माँ अपनी नम आँखों से अपना पल्लू पसार कर बोल पड़ी ” ओमबीर को मिलाकर मेरे दो बेटे हैं और “जबबार” आज से तू मेरा तीसरा बेटा है, तुझे आज से दोनों बेटों के बराबर दर्जा और एहमियत मिलेगी ये एक माँ का वादा है“जैसे सोडे की बोतल से गैस निकल कर उसका पानी शांत हो जाता है

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ठीक वैसे ही जबबार के निकलते ही ओमबीर का शरीर एकदम ढीला और शांत पड़ गया और वो अचेत होकर ज़मीन पर लेट गया! ओमबीर को उठा कर खाट पर लेटाया गया, उसके चेहरे पर पानी के छींटे दिये गए जिससे ओमबीर होश में आ गया! सबने ओमबीर से पूछा कि अब कैसा लग रहा है तो उसने कहा अब मुझे मेरा शरीर काफी हल्का महसूस हो रहा है जैसे काफी सारा वजन मुझ पर से हट गया हो!

ओमबीर को फिर पानी पिलाया गया और खाना दिया गया जिसको उसने खा लिया फिर सारे घरवालों से वो बात करने लगा! भगत अब एक छोटी सी पूजा करके जाने लगा, ये पूजा उसने कुलदेवी और कुलदेवता को खोलने और घर में फिरसे स्थापित करने के लिए की थी! जाने से पहले भगत ने जबबार जिन्न Jinn को हर खास मौके पर पूजने और उसका भोग “मावे की बर्फी” देने की बात को दोहराया और फिर अपने गाँव के लिए निकल गया!

जिन्न ने किया मशहूर Real Horror Stories

5-7 दिन बाद ही ओमबीर एकदम स्वस्थ दिखने लगा, पहले जैसे ही रोजमर्रा के काम करने लगा, खाने–पीने की क्षमता भी पहले जैसी समान्य हो गई थी और ओमबीर का शरीर पहले जैसे आकार में आता जा रहा था, कुल मिलाकर बात यह है कि लगभग सबकुछ पहले जैसा सामान्य हो गया था बस एक बात का ही अंतर था वो था कि अब जबबार, ओमबीर को हमेशा अपने आस–पास ही महसूस करता था और ओमबीर अब खुद को उसके होने से काफी ताकतवर महसूस करने लगा था!

जैसा हम जानते हैं कि ओमबीर खुद एक बड़ा भगत था और लोगो का अच्छा इलाज करने की वजह से उसका नाम आस–पास के गावों में काफी इज़्ज़त से लिया जाता था!
जैसे परेशान लोग ओमबीर के पास अकसर अपनी समस्या लेकर आया करते थे फिरसे वैसे ही अब आने लगे मगर अब इलाज पहले से भी काफी जल्दी, सटीक और कारगर होने लगा क्यूंकि अब जबबार की ताकत भी ओमबीर के साथ थी किसी व्यक्ति के आकर बैठने की बस देर भर ही होती थी कि ओमबीर उसको उसकी समस्या बताकर समाधान तक दे देता था!

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एक बार हुआ ऐसा कि किसी व्यक्ति कि भैंस किसी ने रात में खोल ली और उस व्यक्ति के काफी ढूंढने पर भी नहीं मिली! वह व्यक्ति परेशान होकर ओमबीर के घर सुबह तड़के ही आ गया, उस व्यक्ति ने पानी का ग्लास लेकर पानी अभी खत्म भी नहीं किया था कि ओमबीर बोल पड़ा के “जल्दी से फलां गाँव कि फलां गली में जाकर जग्गी का घर पूछ लिओ उसके घर के पीछे के हिस्से में तेरी भैंस बँधी है,

वो उसको बेंचने वाले हैं इसलिए कुछ लोगों को लेकर जल्दी उसके घर चला जा,” उस व्यक्ति ने ग्लास ज़मीन पर रखा और कुछ लोगों को लेकर उस गाँव गया और अपनी भैंस वापस ले आया!

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कई दिनों तक ओमबीर के गाँव में इसी बात की चर्चा होती रही कि ओमबीर के पास हो ना हो कोई बड़ी शक्ति है जिसके माध्यम से उसने इस समस्या का इतनी जल्दी और सटीक इलाज कर दिया! लोग अब अपनी ऐसी छोटी–बड़ी समस्यायें लेकर लगभग रोज ही ओमबीर के पास आने लगे और समाधान पाकर ओमबीर को दुआएं देकर जाने लगे!

लालची साहूकार को सबक सिखाया Jin ki Kahani

ऐसा ही काफी समय तक चलता रहा अब ओमबीर का नाम पुरे जिले में फैला गया था! फिर एक दिन बहुत दूर गाँव से एक गरीब किसान उसके पास अपनी मुराद लेकर रोता हुआ आया और आते ही ओमबीर के पैरों में गिर गया और मदद की गुहार लगाने लगा! ओमबीर ने उस किसान को पैरों से उठाकर खाट पर बैठाया और पानी पिलाने के बाद उसकी समस्या के बारे में उससे पूछा हालांकि ओमबीर सारा मांजरा जानता था मगर वो किसान के मुँह से सुनना चाहता था जिससे उसका मन कुछ हल्का हो जाये!

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फिर किसान ने बताना शुरू किया कि ” मेरा नाम सुखिया है मैं बिजनौर जिले के एक गाँव का रहने वाला हूँ, घर में बूढ़े माँ–बाप, मेरी घरवाली, 4 बेटियां और एक बेटा है, घर में कमाने वाला मैं एकलौता व्यक्ति हूँ मेरी आमदनी पर ही पूरा घर चलता है! मैं एक किसान हूँ और खेती पर ही निर्भर हूँ मेरी थोड़ी सी पुशतेनी ज़मीन है जिसपर मैं खेती करके अपना परिवार पालता हूँ,

दो महीने पहले मैंने घरवाली के इलाज के लिए गाँव के एक साहूकार से 20,000/-₹ लिए थे बदले में उसने मेरी ज़मीन गिरवी रखकर मुझसे कुछ कागजो पर अंगूठा लगवा लिया था, ज़मीन गिरवी से छुड़वाने का समय छः महीने का था जोकि अभी पूरा नहीं हुआ है मगर अब उस साहूकार ने मेरी सारी ज़मीन हड़प ली है और उस पर वो मजदूरों को लगा कर मेरी लगाई फसल को काट रहे हैं“

Bhoot Pret ki Kahaniya

ओमबीर कुछ क्षणों के लिए आँखें बंद करके जबबार को याद करने लगा तो जबबार भी उसके कान में आकर बोलने लगा और वही बात उसने किसान को दोहरा दी, ओमबीर ने किसान से कहा कि ” सुखिया तुम चिंतामुक्त होकर घर जाओ परसो वो साहूकार तुम्हें खुद तुम्हारी ज़मीन लौटा देगा और साथ में तुम्हारे अंगूठा लगाए सारे कागज़ भी दे देगा!”
किसान ने ओमबीर के इलाज के बारे में काफी सुन रखा था तो उसको विश्वास हो गया! जाने से पहले किसान ने ओमबीर से इलाज के खर्चे के बारे में पूछा तो ओमबीर ने हंसकर कहा की तुम भी सबकी तरह एक किलो “मावे की बर्फी” दे जाना मैं तुम्हारा नाम लेकर प्रसाद चढ़ा दूँगा!

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यह सुनकर किसान को और भी राहत मिली कि इलाज की कीमत “ना” के बराबर थी और वो अपने गाँव लौट गया!
रात हुई ओमबीर अपने कमरे में जाकर जबबार से किसान की समस्या को सुलझाने के लिए कहा तो उधर से जबबार की आवाज आई “ओमबीर मुझ पर विश्वास रख मैंने जैसा तुझसे कहलवाया है वैसा ही होगा, मैं तेरी जबान झूठी नहीं पड़ने दूँगा“ यह आश्वासन सुनकर ओमबीर चैन की नींद सो गया! उधर बिजनौर के गाँव में जहाँ साहूकार रहता था वहाँ उस साहूकार की “तूती” बोलती थी मतलब हर जगह उसकी पहुँच थी जैसे ग्राम पंचायत, प्रशासन, पुलिस आदि!
जैसा कि हम सब जानते हैं साहूकारों को दो ही जरुरी काम होते हैं

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एक तो अपने ब्याज की उगाही और दूसरा अपने फंसे पैसों को डरा–धमका कर निकलना तो ऐसे ही दोनों जरुरी काम ये साहूकार भी करता था साथ में गरीब किसानों से हड़पी ज़मीनों के शाम के समय एक चक्कर लगा लिया करता था! खेतों की ज़मीन पर उगी फसलों को देखता अपने नौकरों और मजदूरों को डांटता और रात में घर आकर खाना खाने के बाद सो जाता,

साहूकार के घर में उसकी पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा था और साहूकार  सबसे ज्यादा प्यार अपने बच्चों से करता था! बच्चों के लिए साहूकार ने सारी सुविधाएं और एशों–आराम अपनी साहूकारी से जुटाया हुआ था!
शाम का ही समय था साहूकार अपने हथियाये खेतों पर चक्कर लगाने आया खेतों को देखा मजदूरों को कल का काम बताया और फिर घर की तरफ खेतों में से होता हुआ जाने लगा,

Horror Story

हल्का अंधेरा भी होने लगा था, थोड़ी ही दूर चलकर उसको कुछ बच्चों के दर्द से कराहने की आवाज़ आई, साहूकार को ये आवाजें कुछ जानी–पहचानी लगी इसलिए उसको रुकना पड़ा, अब साहूकार उन आवाजों का पीछा करता हुआ पगडंडी से उतर कर खेतों में घुस गया, अब आवाजें बहुत तेज़ हो गई थी जैसे ही वो थोड़ा आगे बढ़ा और सामने के मंजर पर उसका ध्यान गया तो उसके होश फाकता हो गए!

Horror Kahaniyan

उसके सामने तीन इंसानी धड़ ज़मीन में गड़े हुए थे और उनका सर बाहर था, और पूरा चेहरा खून से लथ–पथ, आँखें बाहर गिरने को हो रही थी और तीनों की ही जोर–जोर से बिलखने की आवाजें लगातार आने लगी! यें तीन इंसानी धड़ और कोई नही साहूकार के तीनों बच्चे थे!

साहूकार को कुछ नहीं सूझ रहा था! साहूकार को लगा की अपने बच्चों को बचाने के लिए और यहाँ से निकलकर अस्पताल ले जाने के लिए मजदूरों से मदद मांगता हूँ, इसलिए वो वापस अपने मजदूरों के पास दौड़ा मगर वहाँ कोई नही था, अंधेरा बढ़ा गया था साहूकार को कुछ नहीं सूझ रहा था तो वो वापस खुद ही बच्चों को बचाने दौड़ कर उसी जगह आ गया मगर वो क्या देखता है की वहाँ तो कुछ भी नहीं है बस फसल ही लेहलहा रही थी!

A Horror Story in Hindi

साहूकार ने आस–पास सभी जगह देखा मगर उसको बच्चे तो क्या उनका कोई नामो–निशान नहीं दिखा वो काफी डर गया था और उसको अब अपने बच्चों को सुरक्षित देखना था तो वो अब घर की तरफ दौड़ा और कुछ ही देर में घर आ गया, उसकी पत्नी ने उसका हाल देखा उसकी साँसे फूल रही थी

उसकी पत्नी ने उसको खाट पर बैठने और पानी लाने को पूछा तो उसने कहा “पहले ये बताओ बच्चे कहाँ हैं?” पत्नी ने कहा की घर में ही हैं और टीवी देख रहे हैं, साहूकार को इस बात पर भी यकीन नहीं हुआ और उसने जब खुद जाकर देखा तो उसको चैन पड़ा के सच्च में बच्चे तो टीवी देख रहे थे और एकदम ठीक थे!

Short Horror Stories

पत्नी ने पूछा क्या हुआ आपके चेहरे का रंग क्यों उड़ा हुआ है? क्या देख लिया था आपने जो आपकी आँखें भी फटी जा रही थी? ” साहूकार बिना जवाब दिये बोला “कुछ नहीं जल्दी खाना लगा दो“ खाना खाकर साहूकार और उसका पूरा परिवार सो जाते हैं! रात को करीब एक बजे साहूकार को प्यास लगती है और वो उठकर पानी लेना चाहता है मगर खुद को किसी शक्ति के नीचे दबा पता है, हिलने की कोशिश करता है मगर हिल नहीं पाता, पास लेटी पत्नी को आवाज़ देता है मगर उसके गले से आवाज़ ही नहीं निकलती,

साहूकार खुद को एकदम बेबस और अपाहिज जैसा महसूस करता है कुछ देर ऐसा होने के बाद उसको फिरसे नींद आ जाती है अब कुछ देर बाद फिर प्यास लगती है और फिर वो उठने की कोशिश करता है और इस बार सफल रहता है, उठकर देखता है कि सब गहरी नींद में सो रहे हैं और वो रसोई में रखे पानी के घड़े की तरफ बढ़ जाता है!

Jin ki Kahani

जैसे ही घड़े से पानी निकलता है और पीने लगता है उसकी नज़र रसोई में पड़ी एक चीज पर जाती है ये चीज सफ़ेद कपडे में लिपटी एक लाश है, साहूकार डर से चिल्लाता हुआ बाहर आता है और जैसे ही कमरे में आता है वहाँ भी उसको सफ़ेद कपडे में लिपटी दो और लाशें दिखती है, अब उसको समझ नहीं आ रहा क्या किया जाये, अब वो आँगन का रुख करता है वहाँ भी उसको तीन लाशें सफ़ेद कपडे में लिपटी दिखती हैं, साहूकार वहीं घुटनों के बल बैठ जाता है और जोर–जोर से बिलखकर रोने लगता है,

कुछ ही देर बाद उसकी पत्नी उसको उठाती है और पूछती है “क्या हुआ? आप इतना तेज़ रो क्यों रहे हैं?”,  वो नींद में था सपना देख रहा था ऐसा वो पत्नी को कह देता है और उससे सोने को भी कहता है! मगर वो अब अंदर से काफी डर चुका था और वो जानता था कि इतनी जल्दी–जल्दी ये सब होना कोई आम बात नहीं थी जिसको नज़र अंदाज़ किया जाये तो उसने सुबह उठते ही गाँव के एक बड़े भगत को फ़ोन किया और सारे काम छोड़ कर घर आने को कहा!

Jinn

साहूकार गाँव का एक रसूखदार व्यक्ति था तो उसकी बात भला कोई कैसे टाल सकता था तो वैसा ही हुआ भी, भगत अपने सारे काम छोड़ कर साहूकार के घर आ पंहुचा और इतनी सुबह हड़बड़ी में बुलाने का कारण जानने लगा तो साहूकार ने एक सांस में सारी आपबीती कह डाली! भगत को मामले की गंभीराता भाँपते देर ना लगी और उसने साहूकार को कुछ पूजा से जुडा सामान लाने और एक बड़ी पूजा की तैयारी करने को कहा!

साहूकार के पास नौकरों की कमी तो थी नहीं इसलिए एक ही घंटे में सारी तैयारियां पूरी कर ली गई! भगत ने पूजा करके अपनी कुलदेवी का ध्यान लगाया कुछ ही देर में देवी ने भगत के सर आकर अपना परिचय दिया और साहूकार से अपने सवाल पूछने को कहा!

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जिस कमरे में यें पूजा हो रही थी उसमे भगत, साहूकार के साथ साहूकार के माता–पिता और पत्नी भी मौजूद थे जो ये सब होता चुपचाप देख रहे थे क्यूंकि उनको अभी भी किसी बात का पता नहीं था!
साहूकार ने सारी आपबीती ना बताते हुए सिर्फ इतना कहा की पिछले कुछ 12-15 घंटों से मुझे मेरे ऊपर और मेरे परिवार के ऊपर काफी खतरा महसूस हो रहा है, देवी माँ मुझे ये बताओ यह क्या है? और यह कौन कर रहा है? भगत के सर आई देवी ने कहा “तूने सुखिया नाम के किसान की ज़मीन हथियाई है और वहीं से यह जबबार नाम का जिन्न Jinn तेरे पीछे लगा है

, जिन्न ने सुखिया की जमीन वापस दिलाने का वचन दिया है जिसकी अवधी कल सुबह समाप्त हो रही है, या तो तू सुखिया की ज़मीन सारे कागजों के साथ आज ही वापस कर दे अन्यथा कल तेरे इस घर के आँगन में हर तरफ मौत तांडव करेंगी, तेरे इस घर में लाशों के ढ़ेर लग जायेंगे! कल रात तेरी और तेरे परिवार की आखिरी रात होंगी“ इतना कह कर देवी भगत के सर से चली गई!

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यह सुनकर साहूकार और उसका पूरा परिवार सन्न रह गए! फिर भी साहूकार का लालच ये देवी का बताया रास्ता चुनने को तैयार नहीं था, सभी घरवाले साहूकार पर भगत की बात मानने का दबाव बनाने लगे मगर उसने घरवालों को चुप करा कर भगत से इसका कोई दूसरा रास्ता पूछा तो भगत ने कहा की जिन्न Jinn की शक्ति असीम होती है और उसको काटना बहुत ही मुश्किल होता है,

शायद मैं इसका इलाज तो कर दूँगा मगर गारंटी से नहीं कह सकता हूँ की इलाज हो ही जायेगा, और सबसे खास बात यह है की हमारे पास समय बचा ही कहाँ है और पुरे परिवार की जान का जोखिम भी है तो मेरी तो यही सलाह है कि आप देवी की बात मान कर जल्द ही सुखिया को उसकी ज़मीन और कागज़ात लौटा दो क्यूंकि अपनों की जान से बढ़ कर कुछ नहीं होता! ऐसा कह कर भगत वहाँ से चला गया!

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भगत के ऐसा कहने से और घरवालों के दबाव से साहूकार की लालच की भावना जाती रही और उसने “सुखिया” को ज़मीन लौटने का फैसला किया! साहूकार ने अपने पिताजी के साथ गाँव में घूमकर पंचायत जोड़ दी और सुखिया को भी बुला भेजा, सुखिया भी अपनी पत्नी के साथ वहाँ आ गया!

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साहूकार ने सभी पंचों को राम–राम करने के पश्चात् अपनी बात शुरू करते हुआ कहा कि ” मैंने सुखिया को कुछ समय पहले 20,000/-₹ कर्ज ब्याज पर दिया था, जिसको वो चुका नहीं पाया और इसलिए मैंने इसकी ज़मीन अपने पास रख ली थी मगर मुझे बाद में एहसास हुआ कि वो घर में अकेला कमाने वाला है, उसके बच्चे और परिवार उसकी खेतों से की गई आमदनी पर ही निर्भर हैं और मेरे ज़मीन ले लेने से उसके घर में चूल्हा जलना भी मुश्किल हो गया है और मुझसे ये सब अब देखा नहीं जा रहा इसलिए मैं अपने छोटे भाई सुखिया को ये ज़मीन और उसके कागज़ लौटा रहा हूँ

जिससे वो खेतों में काम करके अपने परिवार का भरण-पोषण कर सके और रही मेरे पैसे की बात तो सुखिया पर जब भी पैसे आये वो मुझे बिना ब्याज के कभी भी दे सकता है और अंत में मुझसे जो गलती हुई जिसकी वजह से सुखिया को काफी परेशानी उठानी पड़ी उसके लिए मैं भरी पंचायत में सभी गाँववालों के आगे हाथ जोड़ कर सुखिया से क्षमा मांगता हूँ!”

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सुखिया को इससे ज्यादा कुछ और मिलने की उम्मीद नहीं थी इसलिए उसने पंचायत के आगे साहूकार की माफ़ी और कागजों को स्वीकार किया और अपनी पत्नी को लेकर सबका धन्यवाद करता हुआ अपने खेतों में आ गया! अब सुखिया और उसका पूरा परिवार बहुत खुश थे और दिल से ओमबीर को दुआएं दिये जा रहे थे! शाम हुई सुखिया ओमबीर के घर आ पंहुचा और ओमबीर के पैरों में गिरकर रोने लगा और ओमबीर का बहुत-बहुत धन्यवाद करने लगा!

ओमबीर ने सुखिया को उठाकर चुप कराया और पानी देकर सारी बात पूछी, सुखिया ने सब बता दिया कि कैसे उस साहूकार ने सबके सामने अच्छा बनकर उसको उसकी अमानत लौटा दी, फिर सुखिया ने ओमबीर से पूछा कि “भगत जी ऐसा हुआ कैसा होगा?” तो ओमबीर ने मुस्कुराते हुए कहा कि सुखिया तुमने आम खा लिए हैं ना तो अब पेड़ मत गिनो! सुखिया को भी इस बात से ज्यादा क्या लेना था कि क्या हुआ? कैसे हुआ? तो उसने ओमबीर के हाथ में एक किलो “मावे की बर्फी” का डब्बा थमा दिया और खुश होकर कहा की भगत जी आप इसका प्रसाद चढ़ा दीजिये!

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ओमबीर ने पूजा करके प्रसाद चढ़ाया और बचा प्रसाद अपने घरवालों और सुखिया को दे दिया उसके बाद सुखिया ओमबीर को फिरसे धन्यवाद करके अपने गाँव लौट गया! समय गुजरता रहा सुखिया जैसे और भी सताए और परेशान लोग ओमबीर के पास आकर तुरन्त और सटीक इलाज पाते रहे!

पत्नी ने छोड़ी सांस Jinn

फिर एक दिन ओमबीर के साथ एक बहुत बड़ा हादसा हो गया, ओमबीर की पत्नी जिससे वो बहुत ज्यादा प्यार करता था उसको दिल का दौरा पड़ गया, सभी लोग ओमबीर के साथ उसकी पत्नी को लेकर मैदान वाले सरकारी अस्पताल भागे मगर वहाँ के डॉक्टरों ने मरीज की गंभीर हालत देखकर हाथ खड़े कर दिये और मरीज को शहर के किसी बड़े अस्पताल में ले जाने को कहा! ओमबीर और बाकि सभी लोग शहर के बड़े अस्पताल में लाकर ओमबीर की पत्नी को दाखिल कर देते हैं!

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सुबह से रात हो जाती है डॉक्टर दो बार आकर ओमबीर और उसके परिवार से बात करता है और कहता है कि ” मरीज की हालत बहुत ज्यादा गंभीर है और बचने की उम्मीद बहुत कम है इसलिए हमने मरीज को ICU में रखा है और अगले 24 घंटे इस मरीज के लिए बहुत नाजुक हैं हम अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं, आप लोग भी दुआ कीजिये!” ये कहकर बड़ा डॉक्टर चला गया!

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ओमबीर के पैरों के नीचे से तो जैसे ज़मीन ही निकल गई थी क्यूंकि वो अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता था फिर बच्चों और पूरे घर को उसकी पत्नी ही संभालती थी तो उसके जीवन में उसकी पत्नी ऐसे थी जैसे मनुष्य के शरीर में “रीढ़ की हड्डी” हो! ओमबीर किसी भी हालात में अपनी पत्नी को मरने नहीं दे सकता था इसलिए उसने अपनी माँ से अस्पताल में रुकने को कहा और खुद पूजा करने घर आ गया वो घर पहुँचा ही था की उसकी माँ का फ़ोन आ गया की “डॉक्टर ने अभी आकर बोला है कि हमारी बहु ने सांस छोड़ दी है और अब वो इस दुनिया में नहीं रही!”

मगर ओमबीर को अब भी लगता था कि कुछ हो सकता है तो उसने जल्दी से सारी पूजा की सामग्री जुटाई और पूजा में बैठ कर जबबार को याद करने लगा, जबबार भी तुरन्त धुएँ के आकर में उसके सामने आ गया, ओमबीर ने कहा की “जबबार समझ ले मैं तुझ से आखिरी बार कुछ मांग रहा हूँ और तुझे मेरा कहा मानना ही होगा, मेरी पत्नी को ठीक करके जल्दी घर ले आ“

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जबबार भी उधर से बोला कि “ओमबीर तेरी पत्नी की आयु ऊपर से इतनी ही लिखकर आई थी और अब उसको जाना ही पड़ेगा, मेरी शक्तियां बहुत है मगर उपरवाले की शक्ति के आगे तो कुछ भी नहीं हैं, जैसे एक इन्सान किसी दूसरे इन्सान को परेशान कर सकता है, मार भी सकता है वैसे ही हम भी ऐसा ही कर सकते हैं मगर जैसे इन्सान मौत तो दे सकता है मगर इन्सान को जीवित नहीं कर सकता वैसे ही मैं भी तेरी पत्नी को जीवित नहीं कर सकता“

ओमबीर को गुस्सा आने लगा और वो जिद्द पकड़ कर बैठ गया और उसने जबबार को फिरसे ऐसा ही करने को कहा, जबबार ने कहा ठीक है मैं कोशिश करता हूँ अगर तेरी पत्नी ठीक होकर आई भी तो वो कुछ ही समय के लिए आएगी उसके बाद उसको अपनी अंतिम मंजिल को जाना ही होगा और उसके बाद कुछ नहीं हो सकेगा!”

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ऐसा कह कर जबबार चला गया और ओमबीर भी पूजा वाले कमरे से बाहर आ गया! 5 मिनट भी नहीं गुजरे थे कि ओमबीर की माँ का फिरसे फ़ोन आ गया कि ओमबीर जल्दी अस्पताल आजा बहु कि सांस फिरसे आ गई है डॉक्टर तुझे बुला रहे हैं! ओमबीर जल्दी अस्पताल की तरफ भगा, डॉक्टर से जाकर मिला तो उन्होंने अचम्भे से कहा की ऐसा मेरी जिंदगी में पहला केस है जब मरीज की साँसे इतनी देर बाद वापस लौटी हो! ओमबीर से कहा कि अब तुम्हारी पत्नी एकदम ठीक लग रही है मगर हम सुबह तक अपनी देख–रेख में रखेंगे और सुबह तुम्हारी पत्नी को छुटी दे देंगे, तुम चाहो तो अपनी पत्नी से मिल लो!

ओमबीर जल्दी से ICU में जाकर पत्नी से मिला तो मानो ऐसा लगा की उसको कुछ हुआ ही ना हो!

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पत्नी ओमबीर से कहने लगी मुझे अस्पताल में क्यों लाये हो और आप रो क्यों रहे हो? इसपर ओमबीर ने कहा कि तुझे चक्कर आये और तू बेहोश हो गई थी,अब तू सो जा सुबह घर चलेंगे! ओमबीर ने रात अस्पताल में माँ के साथ जागकर ही काटी और सुबह होते ही जल्दी से पत्नी की छुट्टी करा के घर ले आया और “मावे की बर्फी” का प्रसाद चढ़ाने के बाद पूरे घर में बाँट दिया! ओमबीर की पत्नी एकदम ठीक थी बस बिस्तर से उठने को अभी डॉक्टरों ने मना किया था तो वो बिस्तर पर ही लेटे हुए सबसे बात कर रही थी और वहीं पर खाना–पीना और दवाई ले रही थी!

Jinn

इस चमत्कार की बात पूरे गाँव में फैला चुकी थी और वैसे भी ओमबीर की पूरा गाँव बहुत इज़्ज़त करता था तो इसलिए हर घर से लोग ओमबीर के घर उसकी पत्नी को देखने पूरे दिन आते रहे और ऐसे ही ये पूरा दिन गुजर गया!

टली ‘होनी’ वापस आई Jin ki Kahani

अगले दिन भी शाम तक ओमबीर के परिवार में सब सामान्य ही था मगर फिर अचानक से ओमबीर की माँ की चिल्लाने की आवाज़ पूरे घर में गूँज गई ओमबीर ऊपर वाले कमरे में था और पूजा करने जा ही रहा था कि वो भी ये चीख सुनकर सीढ़ियों से होता हुआ अपने कमरे की तरफ भागा जहाँ उसकी माँ चीख रही थी,

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ओमबीर ने देखा के उसकी पत्नी पलंग से नीचे गिरी पड़ी है और उसके मुँह से खून निकल रहा है, ओमबीर ने अब अपनी सारी हिम्मत जमा की और पत्नी को गाड़ी में डालकर अपने भाई के साथ शहर के उसी अस्पताल को ले आया, जहाँ डॉक्टरों ने ओमबीर की पत्नी को देखते ही मृत घोषित कर दिया, ओमबीर ने दो दिन पहले की बात बताई और पत्नी को ICU में फिरसे रखने को कहा मगर डॉक्टर नहीं माने और ओमबीर और उसके भाई से मृत शरीर को घर ले जाने को कहा!

दिल टूटा साथी छूटा Jinn

भाई के समझाने पर ओमबीर पत्नी के शरीर को घर तो ले आया और घर में ये देख कर मातम छा गया मगर ओमबीर को अभी भी उम्मीद थी तो वो अपने ऊपर वाले पूजा के कमरे में गया और पूजा सामग्री के साथ पूजा करके जबबार को याद करने लगा और जबबार आ गया,

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ओमबीर ने कहा जबबार मुझे मेरी पत्नी की ज़िन्दगी वापस चाहिए इसपर जबबार ने निराशा के साथ मना कर दिया और बोला कि मैंने पहले ही कहा था कि ओमबीर तेरी पत्नी का समय आ गया है और अब उसको कोई नहीं बचा सकता मैंने अपनी पूरी ताकत लगा कर उसको दो दिन जिन्दा रखा मगर अब उसको जिन्दा रखना उपरवाले की शान में गुस्ताखी होगी इसलिए अब यह करना मेरे लिए असंभव है और ये कहकर जबबार वहाँ से चला गया!
ओमबीर ने फिरसे कई बार उसको बुलाने की कोशिश की मगर अबकी बार जबबार नहीं आया और ओमबीर भी निराश होकर कमरे से बाहर आकर सबके साथ रोने लगा!

Jin ki Kahani

समय तो गुजरा मगर ओमबीर अपनी पत्नी को भुला नहीं सका और उसके जिन्दा नहीं बचने की ‘वजह’ वो कहीं ना कहीं जबबार को मानता रहा कि जबबार चाहता तो मेरी पत्नी को बचा सकता था! इसी वजह से उसने अब जबबार को याद करना और उसकी पूजा करना बंद कर दिया बस किसी बहुत खास मौके पर ही जब कुलदेवी और कुलदेवता की पूजा होती तो जबबार की भी मावे की बर्फी का प्रसाद मना दिया जाता और ऐसे अब हमेशा मजबूत रहने वाला जबबार और ओमबीर का सम्पर्क और रिश्ता टूट गया अब ओमबीर को उसकी मौजूदगी का एहसास तक नहीं होता था

Jinn

जैसे वो पहले उसको अपने आस–पास ही पता था और एक बार याद भर कर लेने से उसके शरीर में या उसके सामने आ जाता था अब ऐसा होना एकदम बंद हो गया और ओमबीर ने अब किसी का इलाज करना भी बंद कर दिया, अब ओमबीर भगत के सारे काम छोड़ कर बस अपने बच्चों का भरण-पोषण में लगा रहता है और आज भी अपनी स्वर्गवासी पत्नी को बहुत याद करता है!!!

साथी:

साथी एक हो पर नेक हो,
दोनों की ताकत मिलने से हर मुश्किल आसान हो!
ग़लतफहमी में ना जाएं दोनों एक दूसरे से दूर,
फिर चाहे पूरी दुनिया ही क्यों ना उनके खिलाफ हो!

 

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