पीछे से आती साँसें”
यह घटना उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे की बताई जाती है, जहाँ रात को सड़कें बिल्कुल सुनसान हो जाती हैं। अमित रोज़ की तरह देर रात अपनी बाइक से घर लौट रहा था। रात के 1:20 बजे थे और हल्की-हल्की धुंध सड़क पर फैल चुकी थी। जैसे ही वह पुराने श्मशान के पास पहुँचा, उसे अचानक लगा कि कोई उसके पीछे चल रहा है। बाइक की रफ्तार बढ़ाने के बावजूद उसे अपनी गर्दन के पास किसी की गर्म साँसों का एहसास होने लगा, मानो कोई बहुत करीब से फूँक मार रहा हो। अमित ने पीछे मुड़कर देखने की हिम्मत नहीं की लेकिन उसके कानों में साफ़ किसी के चलने की आवाज़ गूंज रही थी जबकि सड़क पर उसके अलावा कोई नहीं था।
थोड़ी दूर आगे बढ़ते ही बाइक अचानक बंद हो गई। अमित ने कई बार स्टार्ट करने की कोशिश की लेकिन इंजन जैसे पूरी तरह मर चुका हो। तभी उसके कंधे के बिल्कुल पास से एक भारी और टूटी हुई आवाज़ आई, “रुक क्यों गए?” उस आवाज़ में ऐसी ठंडक थी कि अमित का पूरा शरीर सुन्न पड़ गया। उसने डर के मारे आंखें बंद कर लीं और हनुमान चालीसा बुदबूदाने लगा। उसे लगा जैसे उसके पीछे खड़ा कोई धीरे-धीरे झुक रहा हो और उसकी साँसें और तेज़ होती जा रही हों।
अचानक बाइक अपने आप स्टार्ट हो गई। अमित ने बिना पीछे देखे पूरी ताकत से एक्सेलरेटर घुमा दिया और सीधे घर तक बाइक दौड़ाता रहा। घर पहुँचकर भी उसे महसूस हो रहा था कि वह अकेला नहीं है। पूरी रात उसे नींद नहीं आई क्योंकि उसके कानों में बार-बार वही साँसों की आवाज़ गूंजती रही। अगली सुबह जब वह मोहल्ले के एक बुज़ुर्ग से इस घटना के बारे में बात करने गया, तो बुज़ुर्ग का चेहरा पीला पड़ गया। उन्होंने बताया कि उसी श्मशान के पास कुछ साल पहले एक आदमी की सड़क हादसे में मौत हो गई थी और मरते समय उसकी साँसें बहुत तेज़ चल रही थीं। लोग कहते हैं कि वह आज भी रात के समय राहगीरों के पीछे चलने लगता है, ताकि कोई उसकी आख़िरी साँसें सुन सके।
उस दिन के बाद अमित ने कभी भी उस रास्ते से रात में निकलने की हिम्मत नहीं की। लेकिन कस्बे के कई लोग आज भी कहते हैं कि अगर आप देर रात उस सड़क से गुज़रें और अचानक बिना वजह आपके पीछे से साँसों की आवाज़ आने लगे, तो कभी पीछे मुड़कर मत देखना, क्योंकि जो साँसें आपको सुनाई देती हैं वे किसी ज़िंदा इंसान की नहीं होतीं।
story by – shivani singh