khajana ya Qabr Part: – 2

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अब कैसे होगा?

 

टीनू ने घर आकर सारी बात बताई जिससे घरवाले चिंतित तो हुए लेकिन किसी ने इस बात को गंभीरता से नहीं लिया और पिताजी अगले ही दिन एक नया राजमिस्त्री ले आए जो पास ही के एक गाँव में रहता था उसके साथ एक मजदूर भी था, दोनों ने सुबह आते ही काम शुरू कर दिया, शाम को जब वो दोनों अपने गाँव एक सूनसान रास्ते से होकर जाने लगे तो एक जले हुए चेहरे वाली चुड़ैल उनको एक पेड़ से उल्टी लटकी दिखी दोनों डरकर अपने घर की तरफ भागने लगे वो औरत उनका पीछा करने लगीदोनों भागते हुए किसी तरह अपने घरों के अंदर दाखिल हुए

दोनों का चेहरा एकदम सफ़ेद पड़ गया था जैसे मानो किसी ने उनके चेहरे से ‘खून’ खींच लिया हो, सुबह उनके समय पर न आने के बाद पप्पू उनको बुलाने आया लेकिन उन्होंने तबियत खराब होने की वजह से और रात को उस गाँव से निकलते समय हुए हादसे की वजह से अब उस गाँव में काम करने से मना कर दिया।

जैसे-तैसे

शादी का दिन पास आता जा रहा था, परिवार में चिंता बढ़ती जा रही थी कि घर का काम समय पर पूरा होगा या नहीं इसलिए अब परिवार ने खुद ही इस मकान को ठीक-ठाक करने का फैसला लिया, बीच वाला कमरा तो उन दो मिस्त्रीयों के काम करने से लगभग तैयार था ही और बाकी काम जैसे-तैसे सभी घरवालों ने मिलकर समय पर निपटा ही लिया।

विवाह की घड़ी आ गई


इतना सब झेलने के बाद परिवार को अब चैन की सांस लेने का मौका मिला, टीनू का विवाह इस पीढ़ी में घर का पहला विवाह था, इसलिए दूर के रिश्तेदार भी आए और पूरा गाँव इसमें शामिल हुआ, मोतीचूर के लड्डू पूरे गाँव में बांटे गए और घर में लाल जोड़ा पहने नई बहु आ गईटीनू को शादी के बाद घर का सबसे अच्छा वो बीच वाला कमरा दिया गया लेकिन वो कमरा टीनू की पत्नी को रास नहीं आया उसकी तबियत शादी की पहली रात ही बिगड़ गई, उसको चक्कर और सरदर्द होने लगा, सब लोग पूरी रात नहीं सो पाए फिर सुबह जाकर उसका सरदर्द और चक्कर बंद हुए।

 

नई दुल्हन और भयानक अनुभव

 

दुल्हन जिसका नाम शारदा था अपनी दोनों ननद के साथ मिलकर घर को ठीक से सँभालने लगी, तबियत तो उसकी कभी भी ख़राब हो जाती थी लेकिन उसपर वो ज्यादा ध्यान नहीं देती थी और अपना काम ठीक से करके सबका ख्याल रखती थीएक दिन पड़ोस में शादी होने की वजह से सब लोग पडोसी के घर में थे इधर शारदा भी रसोई का काम करके वहाँ जाने वाली थी लेकिन वो रसोई से जैसे ही कमरे में कुछ सामान लेने आई तो उसकी नज़र अपने कमरे में पड़े पलंग के नीचे पड़ी

उसको वहाँ कुछ अजीब लगा तो उसने झाड़ू को पलंग के नीचे घूमना चाहा यह सोचकर कि कहीं कोई बिल्ली या कुत्ता को पलंग के नीचे नहीं है लेकिन उसकी झाड़ू बार-बार किसी बड़ी चीज़ से टकराने लगी और शारदा को यह सब अजीब लगने लगा इसलिए वह झाड़ू बाहर खींचने लगी लेकिन झाड़ू कहीं अटक गई तब उसने सोचा ज़रा नीचे झुककर तो देखूँ कि आखिर मेरी झाड़ू अटकी कहाँ है फिर जैसे ही पलंग के नीचे झांका तो उसका शरीर सुन पड़ गया उसने देखा कि एक जले हुए चेहरे की औरत पलंग के नीचे ज़मीन पर उल्टी लेटी हुई है उसका चेहरा मिट्टी में सना है और उनसे अपने नोकिले नाखूंनों वाले पंजे से उस झाड़ू को पकड़ रखा है

शारदा के होश फाख्ता हो गए उसने जल्दी से झाड़ू से अपना हाथ हटाकर बाहर निकाला लेकिन उस चुड़ैल ने भी अपना पंजा तेज़ी से उसकी तरफ बढ़ा दिया, शारदा का हाथ तो वो चुड़ैल नहीं पकड़ पाई लेकिन उसने अपने नोकिले नाखूनों से शारदा का हाथ घायल कर दिया, शारदा चिल्लाती हुई गली में भाग आई और पड़ोस के शादी वाले घर में जाकर घुस गई।

पीछे पड़ी आफत

 

शारदा ने रोते हुए सबको पड़ोसी के घर में ही सारी बातें बता दी फिर सभी घरवाले पडोसी का कार्यक्रम छोड़कर वापस अपने घर आ गए और सब लोग साथ में बैठकर बातें करने लगे कि आखिर अब क्या किया जाए?पिताजी ने कहा कि ‘यहाँ से तीन गाँव छोड़कर मेरा बचपन का दोस्त रहता है वो झाड़ा भी लगाता है और इस तरह की शक्तिओं का भी इलाज कर देता है तो मैं कल उसको ले आऊँगा और हम उसकी मदद से इस चुड़ैल को यहाँ से निकल देंगे’

सबको यही सही लगा और अब सब सोने के लिए चले गएलगभग एक घंटे बाद शारदा उठी और खुद को रसोई में बंद कर लिया फिर खुद पर वहाँ रखा ‘मिट्टी का तेल’ छिड़का और माचिस से एक दियासलाई जलाकर खुद पर डाल दी जिससे उसका शरीर एक रबड़ के टायर की तरह जलने लगाघरवालों को शारदा के चीखने से पता चला कि कुछ अशुभ हो गया है, सब रसोई की तरफ दौड़े, रसोई का दरवाज़ा भी तोड़ा लेकिन शारदा को नहीं बचा पाए और ऐसे कब्र से निकलने के बाद चुड़ैल ने अपना पहला शिकार कर लिया।।।

आगे की कहानी खजाना या कब्र Part- 3 पढ़िए।

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