Jinn (मरीद) Part-3

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अनजान आरोपी

 

धीर सिंह और विक्रम ने हमज़ा को छोड़कर अपने लगभग सभी देवों और देवियों से पता करने की कोशिश की मगर यह नहीं पता चल सका कि इस षड़यंत्र के पीछे किसका हाथ है,
हमज़ा से मदद इसलिए नहीं ली गई क्यूंकि धीर सिंह के लिए हमज़ा एक ब्रह्मास्त्र के सामान था धीर सिंह उसको सभी रास्ते बंद होने की स्तिथि में ही इस्तमाल करता था और परिवार को भी ऐसा करने की सलाह देता था।

 

मरीद का अपमान


कुछ ही दिन बीते और सालाना पूजा वाला दिन आ गया, इस दिन घर के सभी देवीयों और देवों को भोग लगाया जाता था और सभी की पूजा होती थी इसलिए धीर सिंह ने अपने घर में तैयारी करने के साथ अलग रह रहे अपने बेटों को भी इस पूजा में आने को कहा और उनको विकल्प देते हुए कहा कि अगर वो न आना चाहें तो अपने नये घर पर ही पूजा कर लें लेकिन यह वार्षिक पूजन जरूर होना चाहिएतीनों बेटों और बहुओं ने सलाह करके इसको फातलू खर्च बताते हुए धीर सिंह की बातों को एहमियत नहीं दी और घर के सभी देवी और देवों को रुष्ट कर दिया लेकिन सबसे ज्यादा क्रोधित मरीद यानि हमज़ा हो गया।

गुच्छर ने फिर चली चाल

गुच्छर ने धीर सिंह से इस बार अपने घर आने का आग्रह किया, धीर सिंह ने पहले तो मना किया लेकिन फिर गुच्छर के ज्यादा ज़ोर देने से धीर सिंह को हामी भरनी पड़ीअगली ही सुबह धीर सिंह गुच्छर के यहाँ आ गया और दोनों चाय पीते हुए बात करने लगे, गुच्छर ने कहा कि ‘आपकी पोती के बारे में जानकर अत्यंत दुख हुआ, ऐसा नहीं होना चाहिए था’
धीर सिंह भावुक होकर बोला जो भाग्य में था वो हो गया लेकिन जिसने ये सब किया है उसको इसका परिणाम भुगतना ही पड़ेगा और उसकी आने वाली नस्लें भी इस परिणाम को याद रखेंगी।

गुच्छर ऊपर से धीर सिंह की ऐसी बातों पर सर हिलकर हाँ कर था लेकिन अंदर से वो गुस्से से भरा हुआ था और मन ही मन कह रहा था कि धीर सिंह तेरा और तेरे परिवार का नाम तो मैं इस गाँव से मिटाकर ही मानूँगा और इस गाँव मेरा राज चलेगा।

धीर सिंह उठा और अपने घर की तरफ चल दिया, उसके बाद गुच्छर ने धीर सिंह वाला चाय का प्याला देखा जो एकदम खाली था तो उससे गुच्छर खुश हो गया क्यूंकि उस चाय में गुच्छर ने ‘काला जादू’ करके राख़ मिलाई हुई थी जो अब धीर सिंह पर बहुत ही बुरा असर करने वाली थी

हमले की तैयारी

गुच्छर को पता चल गया था की धीर सिंह के तीनों बेटों ने अपना कवच हटा दिया है यानि उन्होंने वार्षित पूजन जिसमें उनके घर की सभी शक्तिओं को पूजा जाता है और सबको भोग दिया जाता है वो पूजन धीर सिंह के तीनों बेटों ने नहीं की है, धीर सिंह और उसके बड़े बेटे विक्रम ने पूजन की है लेकिन पूरा परिवार साथ नहीं होने से उनकी सभी शक्तियाँ नाराज़ हैं और उनपर हमला करने का यही सही समय है।

 

काले जादू का असर

धीर सिंह घर आते ही बेहोश सा होकर खाट पर लेट गया जिससे घर में सभी काफी डर गए फिर विक्रम ने धीर सिंह के लिए कुछ मंत्र पढ़े और फिर एक गिलास पानी धीर सिंह को पिला दिया जिससे उसको तुरंत उल्टी हो गईफिर एक देव ने विक्रम के सर आकर कहा कि ‘धीर सिंह अब ठीक है लेकिन उसकी मौत का खतरा अब भी उसके सर पर मंडरा रहा है कभी भी कुछ भी हो सकता है, इस घर का पहरा बस मैं अकेला ही दे रहा हूँ लेकिन मैं आने वाले भयंकर हमले से इस परिवार को नहीं बचा सकूंगा क्यूंकि मैं भी अब अकेला पड़ चुका हूँ’इतना कह कर वो देव विक्रम के सर से चले गए, सब चिंता ने पड़ गए कि आखिर ये कर कौन रहा है? धीर सिंह भी कुछ बताने की स्तिथि में नहीं था इसलिए विक्रम ने उसपर ज़ोर नहीं दिया।

आई बुरी खबर


इधर यह सब चल ही रहा था कि विक्रम के सबसे छोटा भाई की पत्नी की मौत की खबर आ गई, विक्रम अपने परिवार के साथ अपने भाइयों के घर आया तब उसको अपने भाई से पता चला कि मौत दम घुटने से हुई है, वो मरने से पहले कह रही थी कि ‘2 चुड़ैल मेरा गला दबा रही हैं और मेरे बाल खिंचकर मुझे घर से बाहर ले जा रही हैं, मुझे बचा लो ये दोनों मुझे मार डालेंगी’हम कुछ समझकर कर पाते इससे पहले ही ये सब हो गया।

हमले हुए तेज़

घर में मातम का माहौल छाया हुआ था मृत शरीर भी ज़मीन पर पड़ा था सभी लोग शोक में डूबे थे फिर औरतों के बीच से किसी के चीखने की आवाज़ आई
धीर सिंह की दोनों बहुओं में दो चुड़ैल घुस गई थी और वो दोनों अपने बाल खोलकर अपने सर को लगातार हिलाये जा रही थी जिससे पास बैंठी सभी औरतें वहाँ से चिल्लाकर भागने लगी।

सहायता की पुकार

धीर सिंह तो घर पर था क्यूंकि वो पूरी तरह ठीक नहीं था लेकिन विक्रम वहाँ मौजूद था इसलिए उसने तुरन्त ज़मीन पर एक कपड़ा बिछाकर मन्त्र पढ़ने शुरू कर दिए और घर की रक्षक शक्तियों को सहायता के लिए बुलाने लगा लेकिन उसके मन्त्रों का कोई भी असर नहीं हो रहा था जैसे मानो किसी ने घर की सभी शक्तियों को बांध दिया हो
अब बहुओं की स्तिथि काफी गंभीर हो गई थी एक बहु अकेली 5-6 लोगों से नहीं सम्भल रही थी, एक बहु दीवार में ज़ोर से सर मारने के लिए लोगों की पकड़ से छुटकर भाग रही थी तो दूसरी ज़मीन में अपनी कोनी मारकर खून निकाल चुकी थी।

 

हमज़ा को बुलाओ

 

विक्रम को अब कुछ और नहीं सूझ रहा था एक तो उसके पिताजी साथ नहीं थे दूसरा कोई शक्ति उसके बुलाने पर नहीं आ रही थी क्यूंकि कुछ तो उसके परिवार ने वार्षिक पूजा पर उनको निराश किया था दूसरा तांत्रिक गुच्छर ने कई ‘बकरों की बली’ देकर अपनी काली शक्तिओं की फ़ौज को उनको रोकने को भेजा था जिससे वो रक्षा के लिए घर में नहीं घुस पा रही थीविक्रम के पास मरीद जिन्न ‘हमज़ा’ को बुलाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था इसलिए उसने बिना देर किए हमज़ा को अपने सच्चे मन से पुकारा और मदद की गुहार लगाई लेकिन हमज़ा नहीं आया विक्रम ने फिरसे कोशिश की लेकिन कुछ नहीं हुआ, फिर विक्रम चाकू से अपनी उंगली काट कर खून की सुरखी देकर हमज़ा से मदद की भीख माँगने लगा, वो गिड़गिड़ा रहा था लेकिन कोई मदद कहीं से भी नहीं मिल पा रही थी और ये सब उसका बेटा अनंत अपनी भीगी आँखों से देख रहा था।

 

अनुभव और साहस

अनंत को पता नहीं क्या सुझा वो वहाँ से भागकर अपने दादाजी धीर सिंह के पास आ गया और एक ही सांस में सारी बात बता डाली, धीर सिंह की तबियत बहुत ख़राब थी लेकिन अब बात पूरे परिवार पर आ गई थी इसलिए वो उठकर बैठ गया लेकिन फिर भी एक बाधा थी कि धीर सिंह ठीक से चल नहीं पा रहा था इसलिए उसने कहा कि ‘गाँव के बाहर जब जंगल वाले रास्ते पर जाते हैं तो वहाँ एक ‘पीर’ है जिसकी ये मरीद जिन्न बहुत मान्यता करते हैं और उस पीर पर मन्नत माँगने पर हो सकता है हमज़ा आकर हमारे परिवार को बचा ले’
इसपर अनंत ने कहा कि ‘ठीक है बाबा मैं पिताजी को वहाँ जल्दी भेज देता हूँ’ और अनंत धीर सिंह के पास से उठकर जाने लगा अचानक धीर सिंह ने अनंत का हाथ ज़ोर से पकड़कर खींचा और फिरसे पलंग पर बैठा दिया और कहा कि ‘बेटा विक्रम शादीशुदा है, तू अभी शादीशुदा नहीं है इसलिए तेरी ‘मुराद’ जल्दी पूरी होगी और अगर हमज़ा तेरे साथ आ गया तो तेरा ‘जादू’ कोई काली शक्ति नहीं काट पाएगी, तू बस यह याद रख, मेरे आशीर्वाद के साथ जा और अपने परिवार को बचा ले’ ऐसा कह कर धीर सिंह ने उसको अपने पूजा के समय इस्तेमाल होने वाला पवित्र गमछा (कपड़ा) दिया और कहा कि ‘इसको सर पर बांधकर इलाज करना।

 

मासूम आग्रह

 

अनंत घर से उस जंगल वाले पीर के रास्ते पर दौड़ गया उधर पूरे परिवार का रोकर बुरा हाल था दोनों बहु खून में सनी हुई पागलों की तरह उनको रोकने वालों पर झपट रही थी कभी उनको नाखून से नोचती, कभी उनके बाल खिंचती तो कभी अपने डांतों से काट लेतीअनंत पीर पर पहुँच गया था फिर उसने जल्दी से पीर पर धूपबत्ती जलाकर अपना माथा टेका, दादाजी के बताये अनुसार एक बर्तन में वहीं के बरमे (हेड पंप) से पानी भरकर पास में रख लिया और अपने मासूम मन से अपने परिवार को बचाने की विनती करने लगा, विनती करते हुए अनंत इतना भावुक हो गया कि उसकी आँखों से आँसू टपक कर पीर पर गिरने लगे कुछ ही देर में अनंत के इर्द-गिर्द एक ठंडी हवा घूमने लगी जिससे अनंत को एहसास हुआ की शायद अब काम बन जाएगा और वो पीर का धन्यवाद करके और उस पानी के बर्तन को लेकर जल्दी से अपने पिताजी के पास बढ़ गया।

क्या अब हमज़ा आएगा?


अनंत सीधा विक्रम के पास पहुँचा और जल्दी से पानी का बर्तन विक्रम को देकर सर पर दादाजी वाला गमछा बांध लिया फिर रसोई से चाकू लेकर ज़मीन पर बैठा गया, हमज़ा को बुलाते हुए और सहायता मांगते हुए अपनी उंगलियों पर चाकू चलाकर खून की लगातार सुरखी देता रहा यह मंज़र बहुत भयानक था एक तरफ पूरा परिवार चींख पुकार कर रहा था दूसरी तरफ यह छोटा बच्चा चाकू से हाथ काटकर खून से ज़मीन लाल कर रहा था और अकेला ही गुच्छर की काली शक्ति की फौज से भिड़ गया थाकुछ ही देर में बहुत बड़े दो हाथों ने अनंत के हाथ रोक दिएअनंत ने सर उठाकर देखा तो हमज़ा उसके सामने खड़ा थाजी हाँ हमज़ा आ चुका था, वो इस परिवार से नाराज़ होकर इसे छोड़ गया था लेकिन उस पीर के आदेश पर और इस बच्चे की मासूमियत और साहस पर वो मरीद जिन्न हमज़ा फ़िदा हो चुका था

 

हमज़ा और काली शक्तियों का सामना

विक्रम ने जल्दी से पीर का पवित्र पानी उठाकर दोनों बहुओं पर छिड़क दिया जिससे वो बचकर भागने लगी फिर उनको विक्रम के भाईओं ने पकड़ लिया और दोनों को वो पवित्र पानी पिला दिया जिसे पीकर वो दोनों शांत हो गई और ज़मीन पर गिर गई फिर उनको उठाकर उनके कमरे में लेटा दिया गया
घर की सभी रक्षक शक्तियाँ बाहर खड़ी थी, काली शक्तिओं की फ़ौज ने उनको रोका हुआ था इसलिए पहले हमज़ा ने उन रक्षक शक्तिओं को काली शक्तिओं से मुक्त कराया जिससे अब वह घर के अंदर आकर काली शक्तिओं से लड़ने लगी, अब काली शक्तियाँ रक्षक शक्तिओं के सामने कमज़ोर पड़ने लगी क्यूंकि हमज़ा जिस भी काली शक्ति को पकड़ता उसको बुरी तरह मारकर भगा देता ऐसे ही उनकी संख्या कम होती गई और उन सभी शक्तिओं को यह घर छोड़कर भागना पड़ा।

 

गुच्छर और बुराई का अंत

 

रात के लगभग 8 बजे थे और पूरा गाँव इस घर के बाहर जमा था, इतना हड़कंप हुआ, खून बहा, चींख पुकार मची फिर एकदम से सब शांत हो गया लेकिन सबके मन में यह सवाल रह गए कि धीर सिंह और उसका परिवार इस गाँव में सबसे सम्मानित लोगों में से हैं जो सबकी हमेशा ही मदद करते हैं फिर उनके साथ कौन और क्यों बुरा करेगा बस यही सवाल सबको खाये जा रहा था, धीर सिंह का परिवार भी बस यही जानना चाहता था तो अनंत ने फिर हमज़ा से कहा हमज़ा सबको उसका नाम और उसकी मंशा बताओ

पूरा गाँव सरपंच सहित इस घटनास्थल पर मौजूद थे, हमज़ा गाँव के सरपंच के अंदर आया और पीपल के चबूतरे पर चढ़कर सबको अपनी भारी आवाज़ में बताने लगा कि यह काम इस गाँव में नये आए तांत्रिक गुच्छर का है वो धीर सिंह और उनकी गाँव में हो रही जयकार से बहुत परेशान है और बहुत गहरी ईर्ष्या करता है, उसने ही पास के शमशान में जाकर अघोर साधना से बकरों की बली देकर एक काली शक्ति की फ़ौज बनाई थी और इस परिवार को जड़ से खत्म करने के किए आज उस फ़ौज को यहाँ भेजा था और गुच्छर अब भी उसी शमशान में साधना कर रहा है, वो काली शक्ति की फ़ौज फिरसे और ज्यादा ताकतवर होकर आती ही होगीहमज़ा ने कहा अगर किसी को यकीन नहीं तो चलो मेरे साथ पास के शमशान में चलकर देख लो..

सारे गाँव वाले, अनंत, विक्रम और उसके भाई सरपंच में आए हमज़ा के पीछे हो लिए फिर सबने अपनी आँखों से उस शैतान तांत्रिक गुच्छर को बकरों की बली देते देख लिया, उसके इर्द-गिर्द खून ही खून था कई बकरों के सर कटे पड़े थे

गुच्छर समझ गया था कि अब गाँववाले उसको नहीं छोड़ेगे इसलिए वो वहाँ से भागने लगा मगर गाँववालों ने उसको पकड़ लिया और बुरी तरह पीटकर उसको निर्मम मौत दे दी जिससे षड़यंत्र, कपट और इर्षा के इस शैतान का अंत हो गया और धीर सिंह के परिवार को धीर सिंह और उसकी रक्षक शक्तिओं खासतौर पर हमज़ा का महत्व पता चल गया सब स्वस्थ होकर फिरसे साथ पहले जैसे रहने लगे।

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