रसूखदार और ताकतवर परिवार

यह कहानी ‘उत्तराखंड’ के ‘अल्मोड़ा’ जिले के एक गाँव की है इस गाँव में एक सम्पन्न और शक्तिशाली परिवार रहता था, इस परिवार का मुखिया 60 वर्ष का था जिसका नाम ‘धीर सिंह’ था, धीर सिंह के चार बेटे और एक बेटी थी, बेटों की आयु 28 से 40 वर्ष तक थी और सभी विवाहित थे,सभी बेटों के संताने थी लेकिन सबसे बड़े बेटे का बेटा पोते- पोतियों में सबसे बड़ा था और उसका नाम ‘अनंत’ था, बेटी सबसे बड़े बेटे से छोटी थी और वो भी विवाहित थी।
शक्तिओं के सच्चे उपासक और गाँव के लिए हितकारी
इस परिवार में अलौकिक शक्तियों को पूजने का चलन था और बड़ी-बड़ी शक्तियाँ इनके पास थी लेकिन उनमें सबसे बड़ी शक्ति एक ‘जिन्न’ था जिसका नाम ‘हमज़ा’ था और यह जिन्न की ‘मरीद’ जाति से थामरीद बहुत ही ताकतवर जिन्न की किस्म होती है जो इंसान की बड़ी से बड़ी इच्छा आसानी से पूरा कर देती है, एक ही झटके में उसको बहुत कुछ दे सकती है लेकिन अगर बिगड़ जाएं तो बेहद खतरनाक साबित होती है और फिर इनको संभालना लगभग नामुमकिन होता है।
गाँव के लिए कल्याणकारी
यह परिवार धीर सिंह के नेतृत्व में चलता था और खुद के भले के साथ गाँव के भोले लोगों पर कोई भूत बाधा आने पर उनकी भी सहायता सबसे पहले करता था इसलिए लोग इनका बहुत सम्मान करते थे।
भूत बाधा

एक दिन एक गर्भवती महिला जंगल से लकड़ी लेकर जैसे ही शाम को घर आई उसको दौरे पड़ने लगे, वो महिला अपने घरवालों को गालियां देने लगी, उनपर थूकने लगी और घरवालों पर जानलेवा हमला करने लगी इसलिए घरवालों ने उसको पकड़ कर खाट से बांध दिया और फिरधीर सिंह को बुला भेजा।
धरपकड़
धीर सिंह ने महिला का सबसे पहले हाल देखा फिर उस जगह का पूछा जहाँ से महिला लकड़ियाँ लेकर आई थी उसके बाद महिला को खाट से खोलने को कहामहिला पकड़ से आज़ाद होने के बाद खुलकर अपनी अजीब हरकतें करने लगी और ज़ोर-ज़ोर से अपने दोनों हाथ ज़मीन में पटकने लगीधीर सिंह बिलकुल भी विचलित नहीं हुए उन्होंने अपनी चीलम जलाई फिर अपनी छड़ी से ज़मीन पर एक आकृति उकेरी उसके बाद चीलम से एक लम्बा कश भरकर कुछ मन्त्र पढ़ते हुए ज़ोर से अपनी छड़ी को जैसे ही ज़मीन पर मारा वो महिला बेसुध होकर ज़मीन पर धीर सिंह के सामने गिर पड़ी जैसे किसी ने गुब्बारे से हवा एक ही झटके में निकाल दी हो
पक्का इलाज
फिर धीर सिंह उठे और अपनी जेब में हाथ डालकर एक पोटली से एक ‘भभूत’ निकाली जिसमें से थोड़ी तो उस महिला के माथे पर मल दी और बची हुई उस घर के चौखट पर लगा दी और परिवार से बोले कि ‘अब डरने की कोई बात नहीं है लेकिन अब किसी गर्भवती महिला को उस जंगल में उस पहाड़ी के पास मत भेजना क्यूंकि वहाँ बहुत ऊपरी हवा होती हैं जो खास तौर पर गर्भवती महिला को नहीं छोड़ती’
फिरसे कुछ हुआ
इस बार गाँव में एक परिवार के 3 दिनों में 2 गाय और 1 बछड़ा बिना बीमारी और वजह के अचानक मर गए और अगले ही दिन परिवार के एक छोटे बच्चे की भी तबियत बहुत ज्यादा बिगड़ गई जिससे ये परिवार सकते में आ गया और उन्होंने धीर सिंह के यहाँ खबर भिजवा दी मगर उस दिन धीर सिंह किसी दूसरे गाँव रिश्तेदार के यहाँ मिलने गए हुए थे इसलिए उनका बड़ा बेटा ‘विक्रम’ और उसके साथ उसका 12 साल का बेटा ‘अनंत’ उनके घर इलाज करने के लिए आ गए
अचम्भा
विक्रम ने अपने बेटे के साथ घर का मुआयना किया लेकिन कुछ उसको कुछ समझ नहीं आ रहा था फिर विक्रम ने अपनी एक शक्ति को आदेश देकर पता लगाने को कहाकुछ ही देर में विक्रम के पसीने छूट गए क्यूंकि वहाँ 1-2 आत्माएं नहीं पूरा शमशान था, किसी ने शमशान जगा दिया था और अब वो शमशान इस घर पर हमला बोल चुका था।
पिता-पुत्र का आदर्श रिश्ता
विक्रम पहले तो थोड़ा घबरा गया फिर उसने बेटे को घर जाने को कहा लेकिन बेटे ने मना कर दिया और कहा कि ‘पिताजी हम दोनों मिलकर इस इलाज को करेंगे और मैं आपको यहाँ इस खतरे में अकेला नहीं छोडूंगा’विक्रम बेटे को लेकर थोड़ा डरा हुआ था क्यूंकि ये साधारण भूत या आत्मा का मामला नहीं था यह तो पूरी शमशान की फ़ौज थी मगर उसको अपने बेटे के ऐसा कहने से बेटे पर बहुत गर्व महसूस हो रहा था।
सावधानी की सलाह
विक्रम ने बच्चे की हालत देखकर पूरे परिवार को सावधान कर दिया और कहा कि ‘किसी ने शमशान को जगाकर आपके परिवार को खत्म करने के लिए ये आत्मओं की फ़ौज भेजी है, आपकी गायों को इन्ही शक्तिओं ने मारा है और अब आपके परिवार की बारी है, इसलिए आप लोग एकदम सावधान रहिये और जैसा मैं कहूँ आपको वैसा ही करना होगा।
काम शुरू हुआ
रात गहरी होती जा रही थी, विक्रम ने एक कमरे में पहले तो पूरे परिवार को बंद करके उस कमरे को मन्त्र से और शक्तिओं के पहरे से बांध दिया फिर खुद अपने बेटे के साथ खाली कमरे में ध्यान लगाकर अपनी कुछ शक्तिओं को एकत्र किया फिर इन शमशान से आई आत्मओं को ठिकाने लगाने को कहा कुछ ही देर में शक्तिओं ने आत्मओं को घर से बाहर कर दिया और घर में शान्ति छा गई
हुआ पलटवार
विक्रम ने परिवार को कमरे से निकाला और कहा कि ‘अब सब कुछ ठीक है और आपका बच्चा भी कुछ देर में बिलकुल ठीक हो जाएगा’ इतना कहकर विक्रम बस मुड़ा ही था कि बच्चा ज़ोर-ज़ोर से हसने लगा, उसकी आँखें निकल कर बाहर गिरने के लिए हो गई और उसकी आवाज़ बहुत भारी जैसी कोई शैतान बोलता है वैसी हो गईजिससे घरवाले बहुत डर गए और विक्रम ने तुरन्त पलटकर अपनी पोटली में हाथ डाला और वह ‘भभूत’ निकालने ही वाला था कि उस बच्चे ने विक्रम को इतनी तेज़ी से धक्का दिया कि विक्रम का सर पीछे की दीवार में जाकर लगा लेकिन विक्रम फिरभी उठकर उस बच्चे को काबू करने के लिए आगे बढ़ा मगर इस बार उस बच्चे के पिता में आई आत्मा ने विक्रम को पीछे से पकड़ लिया जिससे विक्रम बेबस हो गया विक्रम का बेटे अनंत ने विक्रम को बचाना चाहा लेकिन उन दोनों ने अनंत को धक्का देकर दूर कर दिया।
ये नहीं सोचा था

कुछ ही देर में उस बच्चे की माँ में भी एक आत्मा आ गई और वो अपने बाल खोल कर अपने सर को ज़ोर-ज़ोर से हिलाने लगी और बुरी तरह चीखने लगी, दूसरी तरफ उस बच्चे का पिता विक्रम का गला अपनी पूरी ताकत से दबा रहा था और वो बच्चे में आई आत्मा विक्रम के बाल खींच रही थीऐसा मंज़र देखकर बाकी घरवाले बुरी तरह सदमे में आ गए और रोने लगे, अनंत समझ गया था की आज अगर उसने कुछ नहीं किया तो उसके पिता विक्रम आज मारे जाएंगे और साथ में कोई घरवाला भी नहीं बचेगा।
अनंत 14 साल का ही था लेकिन वो ऐसे परिवार में जन्मा था जहाँ ऐसी बातों के निपटने के किस्से आए दिन होते रहते थे इसलिए अनंत सब जानता था और साथ में वह ये भी जानता था कि अब यह शमशान की फ़ौज किसी साधारण शक्ति से नहीं रुकेगी लेकिन उसको कोई खुद का अनुभव नहीं थाअनंत भागकर रसोई में गया फिर उसने वहाँ से एक चाकू लेकर रसोई के एक कोने में जाकर अपनी ऊँगली के ऊपरी हिस्से पर फेर दिया जिससे उसकी ऊँगली से खून निकलने लगा और उसने उस खून से ‘मरीद जिन्न’ ‘हमज़ा’ को बुलाने के लिए ‘सुरखि’ (चढ़ावा) दे दिया और हाथ जोड़कर सच्चे मन में पहली बार हमज़ा को याद किया और मदद के लिए पुकारा।
वफादारी सबसे ऊपर
हमज़ा इस अनंत के परिवार का सच्चा साथी और सेवक था और इस समय इस परिवार के 2 लोग खतरे में थे इसलिए उसको तुरन्त आना पड़ाअरबी पोशाक पहने एक लम्बा और चौडे इंसान जैसा वो दिख रहा था जिसका सर रसोई की छत तक जा रहा था उसके दाँत बाहर की तरफ कुछ निकले हुए थेहमज़ा और अनंत आमने-सामने थे अनंत ने कहा कि ‘पिताजी को बचा लो, वो शमशान की फ़ौज पिताजी को मार डालेगी’
हमज़ा ने इतना सुना और वो उस कमरे की तरफ बढ़ गया जहाँ अब 3 लोग, वो बच्चा उसके पिता और उसकी माँ तीनों विक्रम पर हावी हो चुके थे और किसी भी समय विक्रम की जान जा सकती थी तभी अनंत के पीछे हमज़ा उस कमरे में आता है उसको कोई देख नहीं पाता लेकिन हमज़ा के पैरों की धमक और उसकी तेज़ सांसे सबको महसूस हो जाती है
हमज़ा जाकर सीधे विक्रम में घुस जाता है फिर विक्रम पहले तो उस औरत को धक्का देकर हटाता है फिर उस आदमी के बाल पकड़कर उसकी कमर में ऐसा ज़ोर का थाप मारता है की वो बेहोश हो जाता है
फिर बच्चे को उठाकर कसकर गोदी में भर लेता जिससे वो बच्चा सामान्य होकर रोने लगता है, बाकी दोनों भी कुछ देर में होश में आकर ठीक हो जाते हैंउसके बाद हमज़ा विक्रम के शरीर से निकल कर चला जाता है और विक्रम आगे का इलाज पूरा कर देता है साथ में घर के चारों तरफ मन्त्र पढ़कर लोहे की कीलें ठोक कर घर को कील देता है साथ में हल्दी और नमक पढ़कर भी पूरे घर के बाहर डाल देता है।
कृतिज्ञ परिवार
पूरा परिवार विक्रम और अनंत के पैरों को छूकर इस खतरे से पूरे परिवार को बचाने के लिए धन्यवाद देता है साथ में हज़मा को भोग लगाने के लिए पैसे देकर ही विक्रम और अनंत को वहाँ से भेजता है।।।
हमज़ा और इस परिवार की आगे की कहानी अगले भाग-2 में पढ़िए।