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गरीब परिवार

यह बात 40 वर्ष पहले हरियाणा, पानीपत के एक गाँव की है, यहाँ एक काफी पुराने ज़र्जर होते हुए इस घर में एक गरीब परिवार, माता-पिता अपने चार बच्चों के साथ रहते थे जिसमें 2 लड़के और 2 लड़कियाँ थी।बड़े बेटे का नाम टीनू, छोटे का पप्पू, बड़ी बेटी शामों और सबसे छोटी बेटी का नाम रज्जो था।

विवाह की तैयारी


सभी बच्चे विवाह योग्य थे बड़े बेटे टीनू की शादी होने वाली थी इसलिए सबने सोचा कि क्यों न घर को थोड़ा ठीक-ठाक करा लेते हैं इसलिए उन्होंने एक राज मिस्त्री और एक मजदूर अगले ही दिन घर को ठीक करने के लिए लगा दिये और साथ मे दोनों भाई भी मजदूर का हाथ बटाने लगे जिससे थोड़ा पैसा बच सके और काम भी जल्दी निपट जाए क्यूंकि शादी की तारीख पास ही थी।

यह इतना अजीब क्या है?

इस ज़र्जर पुराने घर के बीच वाले कमरे में फर्श का काफी बड़ा हिस्सा अजीब तरह से उठा हुआ था, सभी बच्चे बचपन मे कई बार इस बारे में पूछ चुके थे लेकिन इसका जवाब घरवाले भी नहीं दे पाते थे

रिश्तेदार और पडोसी कहते थे कि ‘इसमें शायद कोई खज़ाना छुपा होगा जब भी आप लोग इसको खोदकर देखोगे तो हीरे-जवाहरात निकलेंगे और आप लोग अमीर हो जाओगे देख लेना’।घरवाले भी इस बात से परचित थे और एक उम्मीद तो उनके मन में भी जागी हुई थी कि काश भगवान हम गरीबों की सुन ले और हमारे दिन फिर आ जाये।

 

रहस्य खुलने वाला है

घर का काम काफी हो जाने के बाद अब इस बीच वाले कमरे का ठीक होने का समय भी आ गया और सबके मन में वो ख़ज़ाने वाली बात चलने लगी।
मिस्त्री ने कमरे का फर्श तोडना शुरू किया तो सभी घरवाले उस कमरे के फर्श पर नज़र गड़ाकर देखने लगे कि शायद अब वो खज़ाना निकलने ही वाला हो जैसे।

थोड़ा सा फर्श तोड़ने के बाद एक काली सी मिट्टी दिखने लगी और जैसे ही उस मिट्टी पर हथोड़ा पड़ा वो उड़ने लगी और अचानक मिस्त्री काम रोककर उस कमरे से बाहर भागा और उल्टियाँ करने लगा, सब लोग उसके पास आए उसका हाल पूछने लगे , मिस्त्री ने कहा मैं ठीक हूँ और वो उस कमरे में काम करने चला गया लेकिन उसको अब वहाँ अंदर आते ही चक्कर आने लगे तो उसने कहा बाबूजी आज तबियत ठीक नहीं लग रही, अभी मैं जा रहा हूँ और कल सुबह आऊँगा।

आफत बाहर आ गई


मिस्त्री और मजदूर के जाने के बाद सब लोग खाना खाकर सोने के लिए चले गए, पप्पू ने अपनी खाट बीच वाले कमरे के अंदर किसी तरह बिछा ली और सो गया।कुछ देर बाद उसकी खाट उसको खिसकती हुई महसूस होने लगी इसलिए वो डरकर उठ गया और अपने आस-पास माचिस की तीली जलाकर देखने लगा लेकिन कुछ अजीब सा उसको नहीं दिखा इसलिए वो फिरसे सो गया लेकिन इस बार किसी ने उसकी खाट पलट दी और पप्पू नीचे गिरा और बुरी तरह डरकर कमरे से चिल्लाते हुए बाहर भागा
जिससे सभी घरवाले उठ गए और पप्पू से उसके चिल्लाने का कारण पूछने लगे।

पप्पू ने एक सांस में खाट के सरकने और पलटने की बातें बता डाली जिस पर घरवालों को ज्यादा विश्वास नहीं हुआ क्यूंकि पप्पू कभी-कभार शराब पी लेता था और उस दिन भी उसने शराब पी हुई थी।माँ ने कहा कि ‘पप्पू तू मेरे पास सो जा तुझे डर नहीं लगेगा तो पप्पू माँ के साथ सो गया।

 

कीमत और कौन चुकाएगा?

 

अगले दिन पूरा परिवार सुबह से दोपहर तक मिस्त्री और मजदूर की राह देखता रहा लेकिन कोई नहीं आया तो पिता ने बड़े बेटे टीनू को उन्हें देखने के लिए उनके घर भेजा।
मिस्त्री के घर का ताला लगा था इसलिए टीनू मजदूर के घर आ गया वो खाना बना रहा था, टीनू ने गुस्से में उससे कहा कि ‘हम लोग सुबह से तुम लोगों का इंतजार कर रहे हैं तुम लोग न तो घर आए न ही तुम लोगों ने कोई खबर दी ऐसे करते हो तुम लोग काम’।

मजदूर ने नज़रें चुराते हुए कहा कि बाबूजी हम लोग आपके यहाँ काम नहीं करेंगे आप चाहो तो हमारे रुके हुए पैसे भी मत देना।टीनू ने तपाक से पूछा ‘आखिर क्यों? ये तो बता दो, मेरी तो अगले महीने शादी है इसलिए तुम्हें काम के लिए लगाया था’

मजदूर बोला कि ‘बाबूजी कल रात को आपके घर से आने के बाद मेरे साथ रहने वाले आदमी ने बताया कि मैं रात को जब सो रहा था तो कोई साया मेरे इर्द-गिर्द घूम रहा था’
फिर मैं जब सुबह उठकर मिस्त्री के घर गया तो उसके यहाँ ताला लगा था पड़ोस में पूछने पर पता चला कि कल रात को मिस्त्री ने सोते हुए अपनी घरवाली के सर पर डंडो से कई वार किए जिससे उसकी पत्नी बुरी तरह घायल हो गई और अब अस्पताल में है, मिस्त्री को पड़ोस वालों ने पुलिस में दे दिया है, इसलिए मैं बहुत डरा हुआ हूँ और अब आपके यहाँ काम पर नहीं आऊँगा क्यूंकि कल आपके यहाँ से ही जब मिस्त्री की तबियत ख़राब हुई तबसे ही ये सब शुरू हुआ है।

इतना कहकर मजदूर ने अपने घर का दरवाजा बंद कर लिया और टीनू बाहर खड़ा रह गया और एक गहरी सोच में खो गया।।।

आगे की कहानी आप अगले भाग-2 में पढ़ सकते हैं।।।

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