काला जादू: विरक्त महल की कहानी

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इतिहास

 

उज्जैन के बाहरी इलाके में एक पुराना, वीरान महल था — विरक्त महल। कभी राजा वत्सराज का निवास हुआ करता था, लेकिन आज वहाँ बस जंगली झाड़ियाँ, टूटी दीवारें और सन्नाटे की गूंज थी। गाँव के लोग वहाँ जाना तो दूर, उसका नाम लेना भी अपशकुन मानते थे। कहा जाता था कि वहाँ काला जादू किया गया था, जिससे एक आत्मा को कैद कर दिया गया — मगर वो कैद आज भी अधूरी है।

कंटेंट की भूख

राघव, जो मुंबई का एक यूट्यूबर था, अपने पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेशन चैनल के लिए कंटेंट शूट करने उज्जैन आया था। वो डर में नहीं, व्यूज़ में यकीन रखता था। जब उसने गाँव वालों से विरक्त महल की कहानी सुनी, तो वही उसकी शूटिंग लोकेशन तय हुई।“भूत-प्रेत नहीं, बस कहानियाँ हैं,” राघव ने मुस्कुराते हुए कहा, “हम डर बेचते हैं, मानते नहीं।”

 

छायाओं का जागरण

पहली रात: रात के दस बजे राघव अपने दो दोस्तों — आर्यन और दिव्या के साथ महल पहुँचा। उन्होंने कैमरे सेट किए, टॉर्च ऑन की और शूट शुरू किया। महल के अंदर हवा भारी थी, जैसे कोई जीवित चीख दीवारों में फंसी हो।दीवारों पर किसी ने पुराने मंत्रों की लकीरें खींच रखी थीं। ज़मीन पर काले कोयले से बना गोलाकार यंत्र, जिसके बीच में रखी थी — एक सूखी हड्डी और जलता हुआ नींबू।
दिव्या ने कैमरे में फोकस किया और बोली, “ये शायद किसी तांत्रिक क्रिया का अवशेष है।”

राघव ने मज़ाक में कहा, “चलो, भूत अंकल को बुलाते हैं।”जैसे ही उसने वो हड्डी हाथ में ली, अचानक ठंडी हवा का झोंका आया। टॉर्च बंद हो गई। कैमरे की स्क्रीन पर बस एक क्षण के लिए कुछ दिखा —
एक औरत की आकृति, आधे चेहरे पर राख, और बाकी चेहरे पर घावों के निशान।आर्यन चिल्लाया, “दरवाज़ा खोलो!” लेकिन दरवाज़ा खुद-ब-खुद बंद हो गया।फिर एक धीमी, टूटी आवाज़ गूँजी —
“मेरा अनुष्ठान अधूरा है… पूरा कर, वरना तू मेरा होगा।”

 

तांत्रिक देवदत्त की कहानी

 

दूसरी रात: अगले दिन तीनों गाँव के पास के एक वृद्ध तांत्रिक, देवदत्त, के पास पहुँचे। बूढ़ा तांत्रिक पहले तो चुप रहा, फिर बोला —“विरक्त महल में जो आत्मा है, वो मालविका की है — राजा वत्सराज की रानी। राजा ने अमरत्व के लिए उस पर कृष्णक्रिया तंत्र किया था, लेकिन बलिदान के वक्त वो मर गया और मालविका की आत्मा अधूरी रह गई।”उसने तीनों को चेतावनी दी —“उस यंत्र को छेड़ो मत, वरना वो तुम्हारे प्राणों से अपना अनुष्ठान पूरा करेगी।”देवदत्त ने राघव को एक चांदी का ताबीज़ देते हुए कहा, “इसे गले में रखना, ये सिर्फ एक रात बचा सकता है।”

 

आत्मा का प्रकट होना

 


तीसरी रात: रात को राघव अकेला महल लौटा। उसे डर नहीं था — बस एक वायरल वीडियो चाहिए था।
महल में कदम रखते ही टॉर्च अपने आप झपकने लगी। दीवार पर लिखा था —
“रक्त दो… अनुष्ठान पूरा करो…”

अचानक दीवारों से धुआँ उठने लगा। उस धुएँ से वही औरत निकली — मालविका, जिसके बाल ज़मीन तक झूल रहे थे, और आँखों से अंधेरा बह रहा था।
“तुमने यंत्र छेड़ा,” उसने गरजकर कहा, “अब मुझे अपना शरीर चाहिए।”

उसने राघव की छाती पर हाथ रखा, और उसकी उँगलियाँ मांस में धँस गईं। राघव दर्द से चीख़ा, पर तभी उसके गले में बंधे ताबीज़ से तेज़ प्रकाश निकला। आत्मा पीछे हटी, दीवारें काँपने लगीं।
देवदत्त तांत्रिक वहीं पहुँचा, हाथ में अग्निकुंड और राख लिए हुए। उसने ऊँची आवाज़ में मंत्र पढ़ा —

“ॐ कालाग्नि रुद्राय नमः… ॐ प्रेतनाशिनी देवि नमः…”

मालविका ने झपटकर देवदत्त को पकड़ लिया और उसके सिर को झटका दिया। उसका शरीर ज़मीन पर गिर पड़ा। मरते वक्त देवदत्त की उँगली राघव की तरफ़ इशारा कर रही थी — “यंत्र मिटा…”
राघव ने कांपते हाथों से हड्डी और राख पर पानी छिड़का, और यंत्र तोड़ दिया। उसी क्षण आत्मा ने एक भयानक चीख़ मारी, और पूरा महल हिल उठा। उसके बाद सब शांत हो गया।

 

विरक्त महल का सच

 

अगली सुबह गाँव वालों ने सुबह देखा — महल पूरी तरह ध्वस्त पड़ा था। अंदर सिर्फ राख, टूटी कैमरा लाइट और देवदत्त का शव मिला।
राघव गायब था।कई महीने बाद किसी और यूट्यूबर ने वही लोकेशन शूट के लिए चुनी। उसने दीवार पर उकेरे शब्द पढ़े —

“मैंने यंत्र मिटाया नहीं… उसे पूरा किया।”उसके बाद, हर नए चाँद की रात वहाँ किसी कैमरे में राघव की परछाई दिखती है —जो अब “कंटेंट” नहीं बनाता,
बल्कि अपनी अधूरी कहानी पूरी करता है।

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