1 काला जादू की हांड़ी । भूतिया कहानी डरावनी। bhootiya kahani in hindi

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 भूतिया कहानियाँ(Bhootiya Kahaniyan) : अमावस्या की वो काली रात

 

2012 की दिवाली की रात थी माधव और उसके भाई ने अपनी छत पर एक काले जादू वाली हांडी देखी जिसे “घाल” भी कहते हैं, काफी कम लोग जानते हैं की ऐसी घाल किसी को बरबाद करने के उदेश्य से उसमे काला जादू करके तंत्र साधना से बनाई जाती है!

इस घाल में बहुत सारी सामग्री डाली जाती है जैसे बली दिए हुए जीव के मांस के टुकड़े होते हैं, सात तरह की मिठाई होती है, सात तरह के फल होते हैं, सिन्दूर और सिंगार का सामान आदि होते हैं!

काला जादू की हांड़ी का परिचय

ये एक सच्ची आपबीती दिल्ली के एक ऐसे परिवार की है, जिसने बहुत ही नाटकीय और डरवाने  ठंग से जीवन में पतन देखा, बरबादी के एक ऐसे बवंडर का सामना किया जिसे पढ़कर किसी के भी होश फाकता हो सकते हैं! ये कहानी हमसे इस परिवार के सबसे छोटे बेटे माधव ने साझा की है!

2012 में माधव अपने परिवार के साथ दिल्ली के एक छोटे से गांव में रहता था! उनके परिवार में पांच सदस्य थे, माता-पिता एक बड़ी बहन, एक बड़ा भाई और एक कुत्ता भी था जो उनको गिफ्ट में मिला था उस कुत्ते की आँखें नीली थीं ..! माधव के पिताजी का ट्रांसपोर्ट का काम था जो बहुत अच्छा चलता था, दूसरा बिजनेस प्रॉपर्टी की सेल-परचेज का भी था, जिसमें उनके 2 पार्टनर्स थे और वो काम भी काफी अच्छा चल रहा था!

तांत्रिकघाल’ का कहर

घालघाल उस रात माधव की छत पर टूट गई दोनो भाईयों ने उसे अपने सामने टूटते हुए भी देखा और वो दोनो भाई बहुत डर गए और परिवार को इसके बारे में बताया परन्तु किसी ने इसको गंभीरता से नहीं लिया और बात आई गई हो गई!

(आपको यहाँ बताते हुए चले की ऐसी ‘घाल’ दुश्मनी निकलने के लिए परिवार के दुश्मनो के द्वारा तांत्रिक से यह घाल बनवाई जाती है! इस घाल का उद्देश्ये परिवार में आर्थिक संकट लाना, बीमारी लाना, कोट कचेहरी के मुद्दों को लाना और यहाँ तक की परिवार के सदस्यों की मौत तक के लिए यह घाल तांत्रिको द्वारा बहुत सारे पैसे देकर तैयार करवाई जाती है और इस घाल को हिन्दुओं के बड़े त्यौहार जैसे की होली और दिवाली पर ख़ास तौर पर भेजा जाता है।)

अशुभता के स्पष्ट संकेत

माधव के घर हर साल सावन में उनके पूजा वाले कमरे में जहां जमीन पर ‘शिवलिंग’ था और दीवार पर बनी दराज में ‘हनुमानजी’ की पीतल की मूर्ति थी!

वहां हर साल सावन के महीने में सांप निकला करते थे, हर साल सावन में साँप निकलते और माधव और उसका भाई उनको सुरक्षित तरह से पकड़ कर बिना किसी साँप को नुकसान पहुचाये जंगल में छोड़ आते पर इस बार ऐसा नहीं हुआ इस बार जब सांप निकले तो माधव के परिवार ने हमेशा की तरह सांपों को पकड़ने की कोशिश की पर एक सांप इस बार मर गया

जो की पूरे परिवार को बहुत बुरा लगा पर इस बात को भी उन्होंने जाने दिया मगर उनको नहीं पता थाकि ये कोई साधारण बात नहीं थी बल्कि बुरे वक़्त की दबे पाव आहट थी बिना किसी से पूछे और बताये बूरा वक्त घर की चौखट लांग चुका था और अब जीवन में भूचाल आने वाला था!

 

एक दिन अचानक ही बिना किसी भूकम्प के घर पर रखी ‘हनुमानजी’ की पीतल की मूर्ति ‘शिवलिंग’ पर जा गिरी, मूर्ति तो खंडित हो ही गई साथ में शिवलिंग में भी दरार आ गई, ये एक और बड़ा संकेत था के अब बरबादी इस घर से दूर नहीं है! माधव के परिवार के पास अपनी 6 गाड़ियां थी, जिसमे से 4 ट्रक थे और 2 कारें थी! इन बताये हादसों के बाद वो सभी गाड़ियां अगले 2 महीनों में या तो बिक गई या फिर गुंडों द्वारा कब्ज़ा कर ली गई और फिर उनमें से कोई भी गाड़ी माधव के परिवार के पास कभी वापस नहीं आई!

वफादार ने निभाया फर्ज़

एक रात माधव के घर कुछ बदमाश घुस आए सभी घर के लोग सोये हुए थे पर कुत्ता जगा हुआ था जैसे ही बदमाश घर में घुसे कुत्ते ने उनपर हमला कर दिया वो बदमाश डर गए, अफरा-तफरी में उनमे से एक ने कुत्ते के सर पर पत्थर मार दिया जिससे उसका सर फट गया पर वो फिर भी भौंकता रहा और सबको जगा दिया! हार मान कर बदमाशों को भगाना पड़ा! फिर जब कुत्ते को हॉस्पिटल ले जाया गया तब पता चला कि कुत्ता तो अंधा है ये जानकर सब लोग एकदम हैरान रह गए, अंधा होने के बावजूद भी वो सब को पहचानता था अपना काम और फ़र्ज़ अच्छे से निभाता था!

उस चोट से वो कुत्ता उभर नहीं सका और मर गया! बस यूं समझ लीजिए कि उसका मरना माधव फैमिली के बूरे वक्त की शुरुआत थी!

सच्ची रेहमत का करिश्मा

अब उनके परिवार में आए दिन गृह कलेश और नुकसान आम बात हो गया! बिज़नेस में नुकसान के कारण माधव फैमिली पे काफी कर्ज़ा भी हो चूका था, जिसका कोई कारण भी नहीं मिलता था ऐसा आए दिन होता देख माधव के पिताजी और माताजी एक मौलवी के पास गए,

उस मौलवी ने उनका इलाज करने के लिए कहा और उनको एक मिट्टी का मटका दिया साथ ही कहा कि अगर कोई उनके घर लड़ाई करने या पैसा मांगने आये तो उसको उस मटके का पानी पिला देना है और वो बिना झगड़ा किए और बिना पैसे मांगे वहां से वापस चल जाएगा पर साथ में एक बात का विशेष ध्यान रखने को कहा की ये मिट्टी का मटका कभी खाली नहीं होना चाहिए, जिससे उसकी शक्ति बनी रहे और अगर ये मटका खाली हुआ तो इसकी सारी शक्ति खत्म हो जाएगी और फिर ये किसी काम का नहीं रहेगा!

तांत्रिक क्रिया के प्रभाव की शुरुआत

एक दिन एक महिला आपके बेटे के साथ माधव के घर आई और माधव के पिताजी को बुलाने को कहा पर माधव के पिताजी उस दिन घर पर नहीं थे. वो अपने गांव गए हुए थे महिला ने माधव के पिताजी पर पैसे होने की बात कही और कहा के तुम घर वाले जान बूझकर उनको छुपा रहे हो या तो मेरे पैसे अभी दे दो नहीं तो मैंने उसकी फोटो खिंच रखी है मैं एक ही हफ्ते में तुम सभी को बरबाद  कर दूंगी, तुम लोग मेरे परिवार को अभी तक जानते नहीं हो.. ऐसा कह कर वो महिला अपने बच्चे  के साथ वहां से चली गई,

 ठीक उसके तीसरे दिन की बात है माधव के पिताजी अपने एक मित्र के साथ ढाबे में खाना खा रहे थे उन्होंने रोटियां खानी शुरू की और खाते ही चले गए, दो रोटी.. चार रोटी.. दस रोटी फिर बीस रोटी करते-करते वो तीस रोटियां खा गए सब लोग आश्चर्य  से उनको ही देखे जा रहे थे और उनका जो मित्र था उसे तो अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था कि ऐसा कोई इंसान कैसे कर सकता है

जिसकी खुराक तीन या चार रोटी होती है, सब हैरान थे वो दोनों खाना खा कर उठे और माधव के पिताजी चार कदम ही चले थेकि बेहोश होकर जमीन पर गिर गए, उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें डॉक्टर ने बताया के इन्हे लकवा मार गया है और अब ये मुश्किल ही ठीक होंगे और बचने की उम्मीद भी काफी कम बताई गई! अब परिवार सदमे में आ गया और अपने दुर्भाग्य को कोसने लगा!

फिर किसी के कहने पर माधव की माताजी एक मौलवी के पास गई (ये मौलवी उस पुराने मौलवी से अलग था) और मदद के लिए उनसे गुहार लगाई, मौलवी बहुत पंहुचा हुआ था, मौलवी ने उन्हें जरा सा पानी मन्त्र पढ़ कर दिया और बोला इसको अपने पति को पीला देना और सब ठीक हो जाएगा, पैसे का पूछने पर मौलवी ने किसी पैसे की बात नहीं की और कहा के जो ठीक लगे दरगाह में चढ़ा देना!

जब माधव के पिताजी को वो पानी पिलाया गया तब उनपर उस मन्त्र वाले पानी का चमत्कारी प्रभाव पड़ा और वो एकदम से ठीक होकर खड़े हो गए, एकबार को तो सब सन्न रह गए पर खुशी इतनी थी कि सब भुलकर मोल्वी को दुआएं देने लगे!

अब जब मोल्वी को बताया गया कि आपका दिया पानी इतना असरदार था और सब एकदम ठीक हो गया तो उसने 30,000/- रुपये की मांग कर डाली मगर परिवार की आर्थिक स्तिथि इतनी ख़राब थी की परिवार ये रकम जुटाने में सक्षम नहीं था, परिवार ने मौलवी से कहा की ये हमारे लिए आज की आर्थिक स्तिथि के हिसाब से बहुत बड़ी धन राशि है आप कम पैसे ले लीजिए, इसपर मौलवी भड़क गया और माधव के पिताजी को जान से मरने की धमकी देने लगा कि अगर पैसे नहीं दिए तो बहुत जल्दी तुम्हारे पिताजी मारे जाएंगे, मैं ऐसे जिन्न और बुरी आत्माएं उनके पीछे लगाऊंगा जो उनकी जान लेकर ही उनका पीछा छोड़ेंगे!

बेचारा परिवार क्या करता? माधव की माँ ने अपने सोने के जेवर बेच कर उस मौलवी की मांग पूरी की! मौलवी का ऐसा बर्ताव देखकर और उसकी गंदी नजर परिवार की लड़कियों और महिलाओं पर देख कर माधव के परिवार ने उससे पिछा छुड़ाना ही सही समझा!

परिवार की रीढ़ पर वार

कुछ दिनों तक परिवार के साथ सब ठीक चला पर एक बड़ी घटना ने परिवार की शांति फिर से छिन ली.. माधव के पिताजी को किसी झूठे मुक़दमे में जेल जाना पड़ा, जेल जाने से ठीक पहले माधव के पिताजी ने पास ही के एक गांव के सेठ के पास अपना 100 गज का मकान गिरवी रख दिया और कुछ दिनों बाद वो जेल चले गए!

किसी भी रिश्तेदार और पडोसी या दोस्त ने उनका साथ नहीं दिया बस माधव के एक चाचाजी ने 20,000/-₹ की मदद लगाई जिसके बाद भी उनकी जमानात नहीं हुई और उनका वो पैसा भी खराब ही गया! ये तो मुक़दमों की शुरुवात भर थी अब मुक़दमे और आने शुरू हुए 5 मुक़दमे उससे 8 हुए और बढ़ते हुए 12 मुक़दमे तक पहुंच गए,

कई बार जमानत रद्द होने के बाद और काफी कोशिशों के बाद भी जब माधव के पिताजी का छुटने का रास्ता नहीं बना तो परिवार को उनके वकील ने माधव के पिताजी से कानून की निगाहों में दूरी बनाने की सलाह दी जिससे उनकी बची हुई संपत्ति पर कोई कानूनी कार्यवाही न हो सके! अब जज ने मुकदमो की ज्यादा संख्या को देखते हुए माधव के पिताजी की सारी संपत्ति को कुर्की (नीलामी) करने का आदेश दे दिया!

एक दिन नीलामी के लिए वो अफसर अपनी टीम के साथ आए और उस समय माधव और उसकी बहन घर पर थे माधव ने उसी घड़े का पानी उन अफसरों को पिलाया, अफसरों ने उनसे ही बात की और बात करने पर अफसरों को माधव के परिवार के हालात पर तरस आ गया और उन अफसरों ने फिर उनको नीलामी में नुकसान से बचने का रास्ता बताया कि अभी हम जा रहे हैं और अपनी रिपोर्ट में हम घर पर ताला लगा होने की बात लिखेंगे, आप अपने घर से जितना हो सके सामान हटा लेना जिससे कि अगर नीलामी हुई भी तो आपका नुक्सान कम होगा!

घर का आँगन भी गया

परिवार परेशान तो था और हर वक्त इस बवंडर से निकलने का रास्ता खोजता रहता था, इसी कोशिश में उनको अपने पुराने मौलवी जिसने उनको घड़ा दिया था उसकी याद आई और उस पुराने मौलवी के पास जाकर अपनी सारी दुख भरी दास्तान उसको सुना दी साथ ही नीलामी की बात भी मौलवी से करी,

इसपर मौलवी ने कहा के अब जब भी कोई नीलामी अफसर तुम्हारे घर आए तो मुझे बस फोन कॉल कर देना बाकी मैं देख लूंगा! ऐसे 3 नीलामी अफसर उनके घर आए जैसे ही वो आते तो परिवार मौलवी को फोन कर देता और वो बस घर पर बैठकर, पानी पी कर और सलाह देकर चले जाते, अब ऐसा करते-करते परिवार नीलामी से पूरी तरह बच गया!

अब वो सेठ जिसके पास माधव के पिताजी ने घर गिरवी रखा था, उसने घर आकर परिवार पर पैसे देने या घर बेचने का दबाव बनाना और धमकी देना शुरू कर दिया, सेठ और पुराना मौलवी दोनों एक ही गांव के थे तो अब सेठ ने पुराने मौलवी को परिवार का साथ देने से मना कर दिया!

अब जब परिवार अकेला पढ़  गया तो सेठ ने कुछ गुंडों को लेकर माधव के घर में घुसकर बंदूक की नोक पर आधा घर यानि कि 50 गज अपने नाम करा लिया और बाकी का 50 गज परिवार के पास छोड़ दिया और वो भी घर का वो हिस्सा छोड़ा जिसमे ना तो रसोई थी ना बाथरूम और ना ही टॉयलेट था, परिवार के पास बचे हुए हिस्से में यह सब बनवाने के पैसे भी नहीं थे तब उन्होंने मकान को बेच दिया और उसी कॉलोनी में उन्हीं पैसे से एक छोटा सा मकान ले लिया!

सच्ची रेहमत और ईमानदार कोशिश

होली का समय था और फिरसे कुछ टोटका माधव के नये घर के बाहर किया गया! माधव का पैर उस टोटके पर आ गया जिससे कि माधव और उसकी मम्मी की तबियत एकदम से खराब हो गई और घर में भी जबरदस्त कलेश रहने लगा! एक हफ्ते तक घर में खाना नहीं बना!

जब भी कुछ करने जाते तो माधव के भाई या बहन या माताजी का आपस में झगड़ा हो जाता और घर से सभी लोग बाहर निकलने की सोचते घर में कोई रुकना ही नहीं चाहता था जैसे-तैसे ये हफ्ता गुजरा सबने कुछ हल्का फुलका खाकर और चाय पीकर ही काम चलाया! फिर एक हफ्ते बाद माधव और उसकी माताजी अपने पुराने मौलवी के पास जा पहुचे और सब उनको इस टोटके के बारे में, ग्रहकलेश और बाकि परेशानियों के बारे में बता डाला!

 

मौलवी ने अपनी तंत्र साधना से उनको बताया किसी ने आपके परिवार पर बहुत बड़ी तंत्र क्रिया की हुई है और माधव पर इस समय भी उस क्रिया का प्रकोप है और अगर ऐसा है तो अभी इसी समय माधव को उल्टी आ जाएगी और जैसे की मोलवी ने कहा था माधव को उसी समय उल्टी आई,

उसने कुछ खास खाया हुए भी नहीं था उसके बावजूद भी माधव को बहुत मात्रा में उल्टी हुई और माधव का रोना 30-40 मिनट तक बंद नहीं हुआ! इसी बात पर मौलवी को बहुत गुस्सा आया, परिवार के हाल तो वो जानता ही था और साथ में इतने छोटे बच्चे को भी तंत्र क्रिया करने वालों ने नहीं छोड़ा इस पर मौलवी का गुस्सा बिफर गया और उसने परिवार का साथ बिना किसी लालच और पैसे के देने का मन बना लिया!

 

अब ऐसा होने लगा वहां के “टोना टोटका और तंत्र क्रिया” करने वाले अपनी नई-नई क्रियाएँ करते रहते हैं और यहां से मौलवी उनको काटता रहता! क्रिया होने से घर में आराम और शांति भंग हो जाती और मौलवी के इलाज से कुछ दिनों तक शांति और आराम रहता! लेकिन हर बार क्रिया की शक्ति बढ़ती जाती थी और एक वो दिन आया जब मौलवी के हाथ से बात निकल गई और ये सब मौलवी की क्षमता से बाहर हो गया अब कोई नहीं था जो माधव और उसके परिवार को इस तंत्र क्रिया से निकाल पाता!

किरण नहीं, उम्मीद का सूरज

जैसे दिन के बाद रात है और रात के बाद फिरसे दिन को आना होता है वैसे ही एक उम्मीद की किरण बनकर एक जवान लड़का अमृत जो कि ऐसी ही समस्याओं का समाधान करता था उससे माधव के परिवार की मुलाकात हुई और होली के समय उसने परिवार के साथ बैठकर बिना पूछे ही उनके परिवार का पूरा इतिहास बता दिया और क्या उनके साथ कई वर्षों से चल रहा है वो भी बता दिया जिससे परिवार का विश्वास उस लड़के अमृत पर जम गया!

अब परिवार ने अमृत से उनको इस दुख सागर से निकालने की गुहार लगाई पर उसने कहा कि मैं इतना बड़ा काम नहीं कर सकता और आपको अगर इसका स्थायी उपचार कराना है तो मेरे से कहीं ज्यादा काबिल मेरे गुरु हैं और आप कहो तो मैं आपको उनसे मिलवा देता हूं, अमृत के गुरु जिनका नाम रमन था, अमृत ने परिवार को रमन से मिलवा दिया!

अब रमन, माधव के परिवार से मिलने उनके घर आ जाता है और परिवार को उनके घर के बिगडे कुलदेवी और कुलदेवता के बारे में बताता है! वो ये भी बताया है कि आपने अपने कुलदेवी और कुलदेवता की बहुत अनदेखी की है कभी भी खुशी के वक्त उन्हें याद नहीं किया, कभी उनका प्रसाद  चढ़ाने का बोल कर भुल गए इसलिए वो काफ़ी नाराज़ और गुस्से में हैं और यही कारण है कि आपके परिवार पर जब किसी ने तंत्र क्रिया की तो वे उसे रोक नहीं सके और आपकी समस्या बढ़ती चली गई!

आगे रमन ने बताया के मैं एक छोटी सी पूजा करूंगा जिससे आपको थोड़ा फर्क पड़ेगा और आपका काम खुल जाएगा जो अभी एकदम बंधा हुआ है और एक हफ्ते बाद हम बड़ी पूजा करेंगे जिससे कि आपकी सारी परेशानियां जड़ से ही खत्म हो जाएंगी!

मगर माधव का बड़ा भाई नहीं माना और जिद्द पर अड़ा गया की मुझे तंत्र क्रिया करने वालों का अभी नाम चाहिए और मैं उनको नहीं छोडूंगा!

उसको आक्रमक और गुस्से से भरा देख रमन ने कहा कि चलो मैं नाम भी बता देता हूं फिर आप लोग क्या करोगे, उससे लड़ोगे, उसे मारोगे, झगड़ा होगा और पुलिस आएगी पर आपके पास तो कोई सबूत या गवाह ही नहीं है जिससे आप सबित कर सकें कि ये तंत्र क्रिया उसी ने की है, तो आप अब इस बात को जाने दो! ऐसा बोलकर और पूजा करके रमन वहां से चला गया!

अब परिवार को लगा कि हम इस बड़े संकट से निकल जाएंगे पर हुआ फिर इसका उल्टा ही, पूजा वाले दिन ही रमन के जाते ही माधव के बड़े भाई और बड़ी बहन दोनो की नौकरी छूट गई और दोनो को ही काम पर आने से मना कर दिया! परिवार आश्चर्य  में था कि अब ये करने के बाद भी ये कैसे हो गया, माधव ने रमन को कॉल किया और सारी बात बताई

ये सुनकर रमन भी हैरान था कि ऐसा कैसे हो सकता है अब रमन ने अपने देवी-देवताओं से इसकी जानकारी लेनी शुरू की तब एक नई बात सामने आई वो ये थी की माधव के परिवार में “एक मियां” जी भी कई पुश्तों से पूजते हैं और उन्होंने ये माधव के भाई और बहन की नौकरी छूटवाने वाली रोक रमन के इलाज में लगायी है

तभी रमन ने माधव को कॉल किया और कहा कि ये आपके मियां जी की भी पूजा होनी है और कल ही होनी है वो मियाँ जी बहुत बुरा मान गए हैं और इस इलाज में बाधा डाल रहे हैं! रमन ने अपने चेले अमृत से ये पूजा कराने में परिवार का साथ देने को कहा और ये पूजा करने को कहा, पूजा ठीक से सम्पूर्ण हो गई और अब परिवार में सुधार तेजी से दिखने लगा और माधव के भाई और बहन को अगले ही दिन वापस अपनी जॉब पर वापस बुला लिया गया!

अब सब कुछ ठीक होता दिख रहा था और बड़ी पूजा का समय पास आने लगा, जैसा कि रमन ने कहा था वो पूजा बहुत ही जरूरी है और उसे एक हफ्ते बाद ही होना है नहीं तो सब कुछ बहुत ज्यादा बिगड़ जाएगा एकदम ही बिखर जाएगा!

पूजा का समय भी आ गया अब रमन ने माधव को कॉल किया और कहा कि मैं आज पूजा करने आ रहा हूं पर माधव ने कहा कि पूजा के सामान के लिए हमारे पास पैसे नहीं हैं हमने इंतज़ाम करने की भी कोशिश की इंतज़ाम हो नहीं सका और अब इस पूजा को थोड़े समय के लिए टालना पडेगा, रमन ने कहा ऐसा तो हो नहीं सकता जिन देवी-देवताओं से ये इलाज कराया है और उनसे उनकी पूजा और प्रसाद देने का वादा किया है

अगर उनके पूजा और प्रसाद नहीं होते हैं तो वो मुझे भी नुकसान पहुचायेंगे और तुम्हें भी बहुत गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे, तो रमन ने अपने पैसे से ही पूजा करने की पेशकश कर दी! (ये पैसा परिवार ने पूजा के एक हफ्ते बाद वापस कर दिया) जिसको माधव का परिवार मान लेता है और सहयोग करता है!

पूजा संपन्न हो जाती है और परिवार में शांति और सुकून वापस आती है लेकिन कुछ दिनों के लिए अब जो लोग ये तंत्र क्रिया कर रहे थे उनको रमन द्वारा की गई इस इलाज और पूजा का पता चलता है और वो अपनी तंत्र क्रिया तेज कर देते हैं और परिवार में फिर से अशांति सी होने लगती है जैसे कि रात को कोई उनका दरवाजा जोर जोर से खटखटाये मगर दरवाजा खोलने पर कोई ना हो, बुरे -बुरे सपने आना, घर में भूतिया साये दिखना आदि!

 

देवी बनी संरक्षक

मगर पहले और अब में एक बहुत बड़ा अंतर था, अब परिवार के साथ रमन जैसा सच्चा और कर्मठ “भगत” था जिसका भक्ति की तरफ सच्चा और एकदम अटूट समर्पण था, रमन के दिल में लाचार और असहाय लोगो की मदद करने की पवित्र और प्रबल भावना थी!

अब जब भी कोई बाहर से कुछ तंत्र क्रिया करता है तो रमन को पता चल जाता और वो उसकी काट कर देता और परिवार उसकी छाया में सुरक्षित रहता, मगर रमन ने सोचा की ऐसा कब तक चलेगा तो

रमन ने एक तरकीब निकली और वो परिवार के पास गया और बोला के अगर कि सब स्थायी रूप से रोकना है तो आपको मैं अपनी एक देवी दे रहा हूं जो आपके घर की रक्षक बनकर रहेगी ऐसे हर टोने-टोटके और तंत्र क्रिया का कोई भी असर परिवार पर नहीं होने देगी, आपको उनकी पूजा रोज करनी होगी और उनका नाम हर बड़े कार्य में सभी कुलदेवी और कुलदेवता के साथ लेना होगा!

परिवार ये बात मान लेता है तब जाकर परिवार का सुख, चैन और शांति वापस आती है, जो काम और पैसा परिवार का रुका हुआ था वो अब आने लगता है और लगभग सब कुछ सामान्य हो जाता है! इस हादसे को घटे और उनका इलाज हुए आज लगभग 3 साल पुरे हो चुके हैं, परिवार एकदम स्वस्थ और खुशहाल है अब माधव के पिताजी भी जेल से वापस आकर परिवार के साथ रह रहे हैं…!!!

 

ऐसी ही कोई घाल जो एक परिवार की बर्बादी कर सकती है। ऐसी घाल तांत्रिको के द्वारा या परिवार के दुश्मानो के द्वारा समय समय पर भेजी जाती है। ऐसी घाल का अगर समय रहते पक्का समाधान ना हो तो ये घाल बहुत सारी ज़िंदगियाँ बर्बाद कर सकती है.

काला जादू:

दूसरों के सुखों से जलते हैं और अपने दुखों से जहर लेते हैं, ये काला जादू करने वाले भी बिच्छु की तरह डस लेते हैं! काला जादू करके लगा देते हैं लोगों के जीवन में आग, ये जहरीले किसके सगे होते हैं!

 

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