मीठा खून भूत चुम्बक | भारत की सबसे डरावनी कहानी | darawni kahani in hindi

4/5 - (1 vote)

प्रिय पाठकों, हमें उम्मीद है कि आपको हमारी यह कहानी (मीठा खून भूत चुम्बक | भारत की सबसे डरावनी कहानी | darawni kahani in hindi) बहुत पसंद आएगी। ऐसी ही और भी कहानियां पढ़ने के लिए हमारे साथ Dantakatha.com पर बने रहे। धन्यवाद!

Reading Time : 8 Min. (Approx.)

एक रात हमारे मोहल्ले की लाइट चली गई, सब छत पर आकर बैठ गए मगर ‘शगुन’ नीचे ही थी तो मम्मी ने मुझे उसको लेने भेजा, मैं टोर्च जलाकर उसको आवाज़ देता नीचे आया तो देखा एक बहुत तगड़ा आदमी शगुन के सीने पे बैठा उसका गला दबा रहा है और दूसरा ‘मौलवी’ जैसा दिखने वाला उसके बाल खींच रहा है मेरी तो जान हलक में आ गई और मैं चिल्लाकर ऊपर भागा!

फिर क्या हुआ “मीठा खून भूत चुम्बक” पूरी कहानी पढ़कर जाने…

अनिष्ट का आरम्भ

यह दर्दभरी आपबीती मेरे परिवार की है, मेरा नाम शरद, उम्र 32 साल है और मेरी एक बड़ी बहन थी जिसका नाम शगुन था और उसकी उम्र 2012 में 24 साल थी जब हमने उसकी शादी हाथरस (उत्तर प्रदेश ) के एक अच्छे परिवार में कर दी थी, लड़का-लड़की और दोनों परिवार इस शादी से बहुत खुश थे, शादी को हुए एक ही हफ्ता गुजरा था कि मेरी बहन की तबियत बिगड़ गई,

दोनों परिवार इस बात से थोड़ा सा घबरा गए और बहन के ससुरालवालों ने बड़े डॉक्टर को दिखाया और उसके लिखे सारे टेस्ट भी कराये मगर तबियत ठीक नहीं हुई और ना ही टेस्ट में कुछ गलत आया सभी टेस्ट नार्मल ही आये,

अब हमारी और शगुन के ससुरालवालों की चिंता बढ़ गई तो हमने झाड़ फूंक का सहारा लिया और एक ऊपरी शक्तियों का इलाज करने वाले एक ओझा को बुला लिया जिसने बताया की ससुराल के घर से ही लड़की ऊपरी शक्ति की चपेट में आई है और आपको अपने घर में गृह शान्ति करानी होगी साथ में अपने घर के ‘पित्रों’ को पूजा करके मनाना होगा वो काफी नाराज़ हैं! ससुरालवालों ने पूजा और ग्राहशंति दोनों कराये जिससे शगुन एकदम से ठीक हो गई और सबकुछ पहले जैसा सामान्य हो गया!

नन्ही आत्मा ने किया हमला

aatmaकुछ दिनों बाद शगुन जब हमारे पास यानि अपने माइके आई तो उसी दिन पड़ोस में हमारे बराबर वाले घर में सुबह 8 बजे ही एक 5 साल की छोटी बच्ची छत से गिरकर मर गई, उसी शाम को शगुन छत से कपडे लेने चली गई फिर नीचे आकर सबको घूरकर देखने लगी और ज़मीन पर दोनों पैर पसार कर बैठ गई,

हम सब चौंक गए और उसको उठाने लगे तो वो तुतलाती आवाज़ में हमसे लड़ने लगी और फिर छोटी बच्ची की तरह रोने लगी ये सब देख कर हम बहुत डर गए क्योंकि पड़ोस वाली बच्ची जो अभी कुछ घंटों पहले ही गुजरी थी वो बच्ची की आत्मा शगुन में आ गई थी क्यूंकि वो भी तुतलाकर बोलती थी, सबको ऐसे ही घूरती रहती थी और हमेशा ज़मीन पर बैठकर ही खेलती थी, हमारा दिमाग काम नहीं कर रहा था, ऐसा कैसे हो सकता है? अब हमें क्या करना चाहिए? बस ये दोनों सवाल ही हमारे दिमाग में घूमे जा रहे थे!

घर से थोड़ी दूर गाँव में पापा के एक दोस्त रहते थे उन्होंने बहुत सारी सिद्धियाँ की हुई थी जिससे वो लोगों का इलाज करते थे और उनका इलाज आज तक गलत साबित नहीं हुआ था तो पापा ने मुझे उनके घर उन्हें बाइक पर जाकर जल्दी लाने को कहा, मैं उन्हें लेने निकल गया और शगुन को रोने से चुप कराने के लिए घरवाले उसको चॉकलेट और केक देते रहे!

उन अंकल के गाँव में जाकर मैं उनके घर से उनको जल्दी अपने घर ले आया और रास्ते में ही उनको सारी बातें बता दी, अंकल ने आते ही कुछ मिठाई, फलों और एक अंडे से शगुन का उतारा किया फिर मैं जाकर उस उतारे को घर के पास वाले सबसे बड़े चौराहे पर रख आया और जैसे अंकल ने कहा था कोई पीछे से कितना भी आवाज़ से मुड़कर मत देखना मैंने ऐसा ही किया और शगुन ठीक हो गई और खाना खाकर सो गई!

मीठा खून भूत चुम्बक

मीठा खूनअगले दिन मैं और पापा अंकल के घर गए और शगुन की बार-बार ऊपरी चीज़ों से ताबियत ख़राब होने का कारण जानने के लिए अंकल से बात करने लगे! अंकल ने बताया ऐसा मैंने सुना तो था मगर देखा पहली बार ही है, आपकी बेटी शगुन का “मीठा खून” है, हमने इसका मतलब पूछा तो उन्होंने कहा ऐसा व्यक्ति लाखों में एक ही होता है जिसका “मीठा खून” होता है,

बुरी शक्ति“मीठा खून” का मतलब हर व्यक्ति के शरीर में एक तरह की “महक” या “खुशबू” होती है जो इतनी हलकी होती है के हमारा उसपर बिलकुल भी ध्यान नहीं जाता मगर कुछ व्यक्तियों के शरीर में ये “महक” इतनी तेज़ होती है कि इससे ये ‘ऊपरी चीज़ें,’ ”शैतानी शक्तियाँ’ या कोई भी अला-बला फ़ौरन आकर्षित हो जाती है और इनके शरीर में जा घुसती है और इनको परेशानी करती हैं!

पापा ने अंकल से इसका पक्का इलाज करने को कहा, इसके जवाब में अंकल ने कहा कि मैं कोशिश करता हूँ मगर वादा नहीं कर सकता, अगले दिन आकर अंकल ने शगुन को एक मन्त्र पढ़ा “काला धागा” पहना दिया और कहा के बिटिया इसको कभी उतारना मत, इतने ये “काला धागा” तेरे साथ रहेगा इतने तेरा शरीर सुरक्षित रहेगा और कोई बुरी शक्ति तेरा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी!

शगुन दो दिनों बाद अपने ससुराल चली गई वहाँ जाकर उसने सब बता दिया और अब वो ठीक थी मगर एक दिन उसने देखा तो वो “काला धागा” टूटकर या खुलकर कहीं गिर गया था, इस बात को शगुन ने गंभीरता से नहीं लिया और सोचा जब माइके जाऊँगी तो नया बनवा लूँगी!

शैतानी ताकतों के मुँह लगा मीठा खून

शैतानी ताकतशगुन और जीजाजी एक रात मेला देखकर घर लौटे तो घर आते ही शगुन को तेज़ सर दर्द होने लगा और उसकी उल्टियां भी नहीं रुक रही थी, जीजाजी उसको लेकर हॉस्पिटल गए, जाते ही डॉक्टरों ने उसको इमरजेंसी में रखा और उसको गुलुकॉस चढ़ाया, रातभर हॉस्पिटल में रखने के बाद सुबह डॉक्टर ने कहा कि अब ये ठीक हैं

आप लोग इनको घर ले जा सकते हैं फिर जीजाजी शगुन को घर ले आये और घर आते ही शगुन ने चिल्लाना शुरू कर दिया, अपने सर के बालों को नोंचकर उखाड़ने लगी और बालों को तोड़-तोड़कर जमीन पर बालों का ढ़ेर लगा दिया,  बहन में इतनी ताकत पता नहीं कहाँ से आई कि उसके पति, दो देवर और सास के काबू में भी वो नहीं आ रही थी,

किसी से उसके हाथों को नहीं रोका जा रहा था और वो कभी अपने बाल नोंचकर ज़मीन पर फेंक देती तो कभी अपने चेहरे पर नाख़ून से जख्म कर लेती, ऐसा करने से एक भयानक दृश्य वहाँ बन गया था, उसके चेहरे से काफी खून बह रहा था और घर के पूरे फर्श पर शगुन के उखाड़े बाल फैले गए थे!

ऐसा करते हुए उसको एक घंटे से ज्यादा हो चुका था, उसके ससुरजी ने पहले वाले ओझा को बुलाया मगर वो इस बार ये बोलकर चला गया के ये मेरे बसकी बात नहीं है आप अपनी बहु को किसी और को दिखा लीजिये, मैंने अगर ये इलाज करने की कोशिश की तो मैं ही मारा जाऊँगा,

ससुर ने फिर अपने किसी रिश्तेदार को फोन करके जल्दी आने को कहा वो एक पहुँचा हुआ बड़ा भगत था तो उसने आते ही घर के ‘पितृ देवता’ और ‘कुलदेवी’ का प्रसाद चढ़वा दिया जिससे शगुन को थोड़ी राहत मिली, मगर फिर अगले दिन उसने उससे भी ज्यादा हंगामा मचा दिया फिरसे वहीं भगत आए और इलाज करने लगे जिससे शगुन हंसने लगी और भगत से बोली कि “जिन्दा रहना है तो यहाँ से भाग जा, इसको तो मैं लेकर जाऊँगा ही साथ में तेरा नंबर ना लग जाए” मगर वो भगत वहां से भागा नहीं उसने अपना काम पूरा किया और कहा के इसमें एक नहीं दो ‘शैतानी आत्माएं’ हैं

एक तो बूढा मौलवी है दूसरा एक जिन्न है, दोनों मिलकर इसको ले जाना चाहते हैं, ये सुनकर शगुन की ससुराल में सब एकदम ‘सहम’ गए और आगे क्या होगा ये पूछने लगे तब भगत ने कहा के मैं कल एक साधना करूँगा अगर उससे आराम आ गया तो ठीक है वरना मैं इसका इलाज नहीं कर पाउँगा, शगुन को उस रात पूरा आराम तो नहीं आया मगर उस भगत ने उसको उस रात के लिए शांत कर दिया!

दो दिन बाद उस भगत ने हाथ जोड़कर माफ़ी मांग ली और बोला कि ये बात मेरे बस से बाहर है और अगर मैं फिर भी ये इलाज करता हूँ तो मेरे परिवार पर भी ये चीज़ें हमला कर सकती हैं और इतना कहकर वो भगत अपने घर चला गया!

 

मौलवी की आत्मा और जिन्न ने नोंच खाया 

मौलवी की आत्माये सब बातें अब हमारे घर भी पता चली तो शगुन को हम इलाज कराने के लिए अपने घर ले आए और उन्हीं अंकल को हमने फिरसे घर बुलाया और इलाज करने को कहा,

अंकल ने शगुन को देखा और कुछ देर अपनी माला घुमाकर ध्यान लगाया और वही सब बताया जो उस भगत ने बताया था, अंकल ने कहा एक बूढा मौलवी और एक जिन्न ने शगुन के शरीर पर कब्ज़ा जमा लिया है,

ये किसी “टोटके “या “उतारे” के पास से होकर गुजरी थी और ये दोनों (बूढ़े मौलवी की आत्मा और जिन्न) वहीं पर रात में तभी आकर किसी के द्वारा छोड़े गए थे, “मीठा खून” होने की वजह से ये शगुन की तरफ आकर्षित हुए और इसके ‘शरीर’ के अंदर घुस गए, अंकल ने आगे कहा इसके इलाज के लिए मुझे शमशान में जाकर पूजा करनी होगी और  आप लोगों को पूजा के बाद एक बकरे की “बली” भी देनी होगी तब कहीं जाकर मुझे शगुन के ज़िन्दा बचने की थोड़ी उम्मीद लगती है!

danger aatmaअंकल ने अलगी ही रात ये पूजा हमारे साथ करा दी साथ में बली देकर शगुन के ऊपर से उतारा करके वो सब सामग्री वहीं शमशान में रख दी और कहा कि मैंने अपनी तरफ से सब कर दिया है अब आगे सब भगवान के हाथ में है!

कुछ दिनों तक शगुन कुछ ठीक रही खाना भी अब ठीक से खाने लगी थी, मैं शगुन की तरफ देखता तो इन 4-5 दिनों में इन ‘शैतानी शक्तियों’ ने उसका बुरा हाल कर दिया था, दोनों आँखें अंदर धंस गई थी, आँखों के नीचे सारी त्वचा काली पड़ गई थी, बाल ऐसे लग रहे थे जैसे आधे से ज़्यादा उड़ चुके हैं और आँखों के अंदर लाल रंग भरा पड़ा था, मुझे मेरी बहन पर दया आ रही थी और मैं रोज उसके ठीक होने की दुआ भगवान से किया करता था!

 

मीठा खून अजूबा जीवन ले डूबा 

3-4 दिन ही गुजरे थे कि शगुन को अब फिरसे कभी सरदर्द होता तो कभी वो डरकर घर में ही इधर से उधर भागती, हमने अंकल को ये सब बताया तो वो बोले लगता है हमारी पूजा का असर इतना ही था और अब शैतानी ताकतें वापस आ गई है!

शगुन अब रोज ही खेलने (आत्मा शरीर में आनेपर सर को गोल घुमाना और हाथो पैरों को ज़ोर से ज़मीन पर पटकना ) लगी थी, थोड़ी देर भी उसको अकेला छोड़ते तो वो डर जाती, पूरे घर में शगुन की तेज़ चीखें कभी भी सुनाई दे जाती, जब होश में होती तो मम्मी पापा से कहती मुझे बहुत डर लगता है ऐसा लगता है मैं मरने वाली हूँ, मुझे बचा लो, मैं मरना नहीं चाहती, उसके कमरे से उसके सोने के बाद ‘गुर्राने’, तेज़-तेज़ साँसे लेने और किसी के जोर जोर से चलने की आवाजें आती थी,

एक रात हमारे मोहल्ले की लाइट चली गई, सब छत पर आकर बैठ गए मगर शगुन नीचे ही थी तो मम्मी ने मुझे उसको लेने भेजा मैं टोर्च जलाकर उसको आवाज़ देता नीचे आया तो वो खौफनाक मंज़र देखा, जो आज भी मुझे जब याद आये तो अंदर तक डरा देता है,  मैंने देखा कि एक बहुत तगड़ा आदमी शगुन के सीने पे बैठा उसका गला दबा रहा है और दूसरा ‘मौलवी’ जैसा दिखने वाला पूरी ताकत से उसके बाल खींच रहा है मेरी तो जान हलक में आ गई और मैं चिल्लाकर ऊपर भागा और मम्मी-पापा को लेकर नीचे आया

तो सबने देखा शगुन सांस नहीं ले रही है, तभी हम शगुन को लेकर हॉस्पिटल गए तो डॉक्टर ने उसको ‘मृत’ घोषित कर दिया, बात साफ थी ज़िन्दगी मौत से हार चुकी थी और साथ में हमारी सभी कोशिशों और उम्मीदों का भी ‘दम’ घुट चुका था!

 

मीठा खून किसी का न होये

शगुन के गुजरने के तीसरे दिन से ही हमें भी उन शक्तियों ने परेशान करना शुरू कर दिया, हमारे खाली पड़े कमरों से फिरसे किसी के गुर्राने की आवाज़ आती तो कभी कोई ज़ोर से बात कर रहा हो ऐसा लगता, एक दिन दोपहर का समय था हमारी बुआजी और मम्मी एक कमरे में दीवार से लगी खाट पर बैठे थे,

हमारी बुआजी और मम्मी चींखकर बाहर भागी इतनी तेज़ चीखें सुनकर हम सब आँगन में इकठ्ठा हो गए तो मम्मी फूलती हुई सांस में बोली कि किसी ने दीवार से हाथ निकलकर अभी मेरा गला दबाया इसपर बुआजी भी बोली मैंने अपनी आँखों से वो दो हाथ दीवार से निकले देखे हैं, हम सब डरे हुए थे कि अब किसी और के मरने का नंबर तो नहीं है

इसलिय हमने अंकल को बुलाकर उन शैतानी आत्माओं का निपटारा करने को कहा, उन्होंने कहा शगुन का तो “मीठा खून” था इसलिय मैं उसको इतनी कोशिश के बाद भी बचा नहीं सका, जिसका मुझे अफ़सोस है और मैं आप सबको बचाकर इसका प्रायश्चित जरूर करना चाहता हूँ, हमें एक बड़ा हवन ग्रह शुद्धि और शान्ति के लिए करना पड़ेगा,

हमने देर ना करते हुए वो हवन करा लिया और अंकल के दिये ” मन्त्रों से पढ़े हुए” काले धागे अपने गले में डाल लिए तब जाकर हमें उन शैतानी आत्माओं से छुटकारा मिला मगर आज भी दुख इस बात का है कि काश शगुन का “मीठा खून” ना होता, उसका भी खून हमारे जैसा होता तो आज वो भी हमारे बीच जिन्दा होती!

मैं दिल से दुआ करता हूँ कि ऐसा ‘मीठा खून’ किसी का ना हो, जिससे उनकी जान और उनके परिवार का सुख-चैन चला जाए!

मेरी बहन की ‘पवित्र आत्मा’ के लिए दुआ कीजियेगा…!!!

विधि का विधान:
मीठा खून किसी का ना होये,
तड़प कर जिए वो और बार-बार घायल होये, मीठा खून किसी का ना होये!
आए दिन उसपर भूत-जिन्न चिपटें घरवालों की आफत होये
मीठा खून किसी का ना होये!

 

नोट: अपने डरावने सच्चे किस्से हमें बताएं, पैसा और नाम कमाएं!

Click Here!

अत्यंत डरावनी कहानियाँ | Atyant Daravani Kahaniyan

प्रिय पाठकों, हमें उम्मीद है कि आपको हमारी यह कहानी ( मीठा खून भूत चुम्बक | भारत की सबसे डरावनी कहानी | darawni kahani in hindi) और इसके जैसी कहानियां जैसे वशीकरण की कहानी (Vashikaran ki Kahani), काला जादू की कहानी (Kala Jaadu ki Kahani), डायन की कहानी (Daayan ki Kahani), छलावा की कहानी (Chhalawa ki Kahani), भूत की कहानी (Bhoot ki Kahani), प्रेत की कहानी (Pret ki Kahani), जिन्न की कहानी (Jinn ki Kahani), पिशाचिनी की कहानी (Pishachini ki Kahani), चुड़ैल की कहानी (Chudail ki Kahani), भूतनी की कहानी (Bhootni ki Kahani) आदि पसंद आ रही होंगी। 

 Warning: Dantakatha.com की सभी कहानियां Copyrighted है! इनको Copy करना Copyright Law का उलंघन मन जायेगा!

ऐसी और भी कहानियां जैसे Hindi Horror Story, Real Horror Story In Hindi, Real Ghost Story In Hindi पढ़ने के लिए आप हमारे साथ पर बने रहिये। 

 

साथ ही आप भी अपने ऐसे अनुभवों को जो की Creepy, Horror, Ghost, Scary, Scoopy, Haunted, Paranormal हों उनको हमारे साथ साझा करके नाम और पैसा कमा सकते है। 

 

Leave a Comment

Earn money

Recent Posts